शहर से बाहर शिफ्ट होंगे बस अड्डे, झुमका तिराहा पर बनेगा मेगा बस टर्मिनल

0 28

- Advertisement -

शहर से बाहर शिफ्ट होंगे बस अड्डे, झुमका तिराहा पर बनेगा मेगा बस टर्मिनल

बरेली। शहर की सड़कों पर लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या और रोजाना लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए परिवहन निगम और जिला प्रशासन ने बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है।

- Advertisement -

अब रोडवेज बसों का संचालन शहर के भीतर स्थित बस अड्डों से नहीं, बल्कि शहर के बाहर विकसित किए जाने वाले अत्याधुनिक बस टर्मिनलों से किया जाएगा।

इस योजना के तहत बरेली को जल्द ही नए सैटेलाइट और मेगा बस अड्डों की सुविधा मिलने जा रही है।

घनी आबादी के बीच स्थित पुराना रोडवेज बस अड्डा लंबे समय से प्रशासन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

किसी भी वीआईपी मूवमेंट या बड़े आयोजन के दौरान इसे बंद करना मजबूरी बन जाता है।

वहीं, बसों की आवाजाही के कारण आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। इसका सीधा असर आम नागरिकों और यात्रियों पर पड़ता है।

दूसरी ओर, मौजूदा सैटेलाइट बस अड्डा भी अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। यहां यात्री सुविधाओं की कमी, अव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक दबाव के चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने शहर के बाहर आधुनिक बस अड्डों के विकास की योजना को तेज कर दिया है।

इस कड़ी में दिल्ली और रामपुर रूट की बसों के संचालन के लिए झुमका तिराहा पर करीब 20 एकड़ भूमि में अत्याधुनिक मेगा बस टर्मिनल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

प्रस्तावित टर्मिनल में आधुनिक यात्री सुविधाएं, सुव्यवस्थित पार्किंग, बस बे और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम होगा।

वहीं, सैटेलाइट बस अड्डे को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर इंटर स्टेट बस टर्मिनल के रूप में विकसित करने के लिए नया ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है।

इस परियोजना में बस अड्डे के पीछे स्थित रोडवेज वर्कशॉप की भूमि को भी शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि निर्माण कार्य मार्च 2026 से शुरू हो सकता है।

रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी के अनुसार, नई कार्ययोजना के तहत अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के निर्माण में एनओसी जैसी औपचारिकताओं की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे परियोजना को तेजी मिलेगी।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में सैटेलाइट बस अड्डे से दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़ और उत्तराखंड समेत कई राज्यों के लिए बसें संचालित होती हैं।

पीपीपी मॉडल पर इसके विकास से यात्रियों को आधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, साथ ही बरेली की यातायात व्यवस्था भी सुचारू हो सकेगी।

रिपोर्ट /आसिफ अली