इंदौर में दूषित पानी से मौतें, प्रशासन पर गंभीर सवाल

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इंदौर में दूषित पानी से मौतें, प्रशासन पर गंभीर सवाल

रिपोर्ट/आसिफ अली

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दूषित जल संकट से हाहाकार: भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा बढ़ा, जांच के घेरे में नगर प्रशासन

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

इस घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर केवल 3 मौतों की पुष्टि की है।

इस विरोधाभास ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद से इलाके में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात बने हुए हैं।

दूषित पानी के सेवन से उल्टी, दस्त, बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायतों के साथ सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब तक कुल 1146 मरीजों का इलाज किया जा चुका है, जिनमें से कई की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पेयजल लाइन में सीवेज का पानी मिल जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन को पानी की गंध और रंग बदलने की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

यदि शिकायतों पर गंभीरता दिखाई जाती तो इतनी बड़ी जनहानि को टाला जा सकता था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए लापरवाही के आरोप में दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि दो कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है।

इसके अलावा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। जल प्रदाय व्यवस्था और संबंधित विभागों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

साथ ही यह भी कहा गया है कि सभी पीड़ितों का इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित इलाके में शुद्ध पानी की आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

फिलहाल भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और एहतियातन दवाइयों का वितरण भी किया जा रहा है।

हालांकि, स्थानीय लोगों में अब भी डर और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

यह घटना एक बार फिर शहरी बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर स्वच्छ पेयजल व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है।

सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी और क्या भविष्य में ऐसी लापरवाहियों से आम जनता को सुरक्षित रखा जा सकेगा, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद फाइलों में दफन हो जाएगा।