मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का UCC पर विरोध, बोले- शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं; देशभर में आंदोलन की तैयारी

0 23

- Advertisement -

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का UCC पर विरोध, बोले- शरीयत में दखल बर्दाश्त नहीं; देशभर में आंदोलन की तैयारी

रिपोर्ट/आसिफ अली

- Advertisement -

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष ने गुजरात में UCC लागू करने के फैसले पर जताई आपत्ति, अहमदाबाद में होगी बड़ी बैठक

बरेली। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देशभर में बहस के बीच बरेली से बड़ा बयान सामने आया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने UCC का कड़ा विरोध करते हुए इसे शरीयत में हस्तक्षेप बताया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज इस कानून को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा और इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

मौलाना रजवी ने कहा कि गुजरात में UCC लागू करने की प्रक्रिया से जो बातें सामने आ रही हैं, वे सीधे तौर पर इस्लामिक शरीयत के खिलाफ हैं।

उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित प्रावधानों में तलाक के अधिकार में बदलाव, हलाला और इद्दत पर रोक, एक विवाह की बाध्यता और दो बच्चों की सीमा जैसे मुद्दे शामिल हैं, जो मुस्लिम पर्सनल लॉ से टकराते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन नियमों का पालन नहीं किया गया तो लोगों को सरकारी योजनाओं और लाभों से वंचित करने जैसी बात सामने आ रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है। मौलाना के अनुसार, ऐसे प्रावधान सामाजिक और धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं।

“UCC की जरूरत नहीं”मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि देश में पहले से ही अलग-अलग समुदायों के लिए विवाह, संपत्ति और पारिवारिक मामलों से जुड़े कानून मौजूद हैं और पिछले कई दशकों से उन पर अमल हो रहा है। ऐसे में UCC लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने 21वें विधि आयोग का हवाला देते हुए कहा कि उस समय UCC को गैर-जरूरी बताया गया था, लेकिन अब 22वें विधि आयोग द्वारा इस पर दोबारा विचार किया जा रहा है, जो विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है।

देशव्यापी विरोध की तैयारी मौलाना ने कहा कि इस मुद्दे पर देशभर के उलेमा और मुस्लिम बुद्धिजीवी जल्द ही अहमदाबाद में बैठक करेंगे। इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक और कानून के दायरे में रहेगा।

उन्होंने कहा, “अगर UCC लागू किया जाता है तो मुस्लिम समाज सड़कों पर उतरकर विरोध करेगा। यह केवल मुसलमानों का नहीं, बल्कि अन्य समुदायों का भी मुद्दा है।”