योगी सरकार के बजट से बरेली फिर पिछड़ा, शहर को बड़ी योजनाओं से किया गया नजरअंदाज

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योगी सरकार के बजट से बरेली फिर पिछड़ा, शहर को बड़ी योजनाओं से किया गया नजरअंदाज

रिपोर्ट/आसिफ अली

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बरेली। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट को सरकार भले ही ऐतिहासिक बता रही हो, लेकिन बरेली के व्यापारिक वर्ग में इसे लेकर नाराजगी साफ नजर आ रही है। व्यापारियों का कहना है कि बरेली जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र को इस बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई।

लखनऊ और दिल्ली के बीच स्थित बरेली को चुनावी बजट से कई बड़ी सौगातों की उम्मीद थी, लेकिन बजट घोषणाओं में शहर की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया। व्यापारियों के अनुसार, कुछ योजनाओं में महिलाओं के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं, जबकि बरेली के विकास से जुड़ी मांगें अधूरी रह गईं।

AIIMS, मेडिकल कॉलेज और नाथ नगरी कॉरिडोर पर नहीं मिला कोई ठोस प्रावधान
बरेली के व्यापारियों की प्रमुख मांग थी कि शहर में एम्स (AIIMS) की स्थापना और एक नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की घोषणा की जाए।

मंडल मुख्यालय होने के बावजूद बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

इसके साथ ही शिक्षा क्षेत्र में रूहेलखंड विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने और ऐतिहासिक बरेली कॉलेज को स्वतंत्र यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग भी लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन बजट में इन पर कोई चर्चा नहीं हुई।

पर्यटन और धार्मिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए व्यापारी नाथ नगरी कॉरिडोर के लिए बड़े बजट आवंटन की उम्मीद लगाए थे। साथ ही, हवाई सेवाओं के विस्तार को लेकर भी निराशा है क्योंकि फिलहाल बरेली से सीमित शहरों के लिए ही उड़ानें संचालित हैं।

व्यापारियों का कहना है कि भाजपा का मजबूत गढ़ होने के बावजूद बरेली को इस बजट में वह महत्व नहीं मिला, जिसका शहर हकदार है।