अंतरात्मा की आवाज़ पर इस्तीफा: बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का साहसिक और सिद्धांतवादी कदम

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अंतरात्मा की आवाज़ पर इस्तीफा: बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का साहसिक और सिद्धांतवादी कदम

रिपोर्ट/आसिफ अली

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बरेली।बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा पद से इस्तीफा दिए जाने की खबर ने प्रशासनिक महकमे से लेकर आमजन तक गहरी हलचल पैदा कर दी है।

कानपुर आईआईटी से स्नातक और 2016 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को विभाग में एक ईमानदार, सुलझे हुए और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में जाना जाता है।

उनकी कार्यशैली और निष्पक्ष निर्णयों के चर्चे लंबे समय से प्रशासनिक हलकों में होते रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह इस्तीफा शंकराचार्य प्रकरण और यूजीसी के नए नियमों से जुड़े घटनाक्रमों के साथ-साथ बटुक शिष्यों के साथ हुई कथित अभद्रता और मारपीट से उन्हें पहुंचे मानसिक आघात का परिणाम बताया जा रहा है।

अपने लिखित संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं के बीच पद पर बने रहना उनकी अंतरात्मा को स्वीकार नहीं है। उनका मानना है कि प्रशासनिक पद केवल अधिकार का नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक होता है।

इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में लगे नेम बोर्ड से नाम हटाकर उस पर ‘Resign’ लिखा जाना और उसकी तस्वीरों का सोशल मीडिया पर वायरल होना, इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक प्रतीकात्मक बना गया। यह तस्वीरें सिस्टम के भीतर उठती असहमति और आत्मसम्मान की आवाज़ के रूप में देखी जा रही हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर चार अपर जिलाधिकारी (ADM) और दो उपजिलाधिकारी (SDM) अलंकार अग्निहोत्री से बातचीत के लिए पहुंचे। बंद कमरे में लगातार वार्ता जारी है। बताया जा रहा है कि वार्ता से कुछ मिनट पहले दिए गए उनके बयान में भी उन्होंने अपने निर्णय को भावनात्मक नहीं, बल्कि सिद्धांतों पर आधारित बताया।

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में सामने आए हैं। कई लोग इस कदम को ‘अंतरात्मा की जीत’ और ‘सिस्टम के भीतर से उठी ईमानदार आवाज़’ बता रहे हैं। वहीं, कुछ वर्गों में इस मुद्दे को नीतिगत बहस और प्रशासनिक संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस्तीफे को लेकर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। उच्च स्तर पर पूरे मामले पर विचार-विमर्श जारी बताया जा रहा है।

कुल मिलाकर, सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का यह कदम एक ऐसे अधिकारी की छवि सामने लाता है जो पद, प्रतिष्ठा और दबाव से ऊपर उठकर मूल्यों और आत्मसम्मान को प्राथमिकता देता है। यह घटनाक्रम न सिर्फ प्रशासन, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर आत्ममंथन का विषय बन गया है।