उर्स-ए-आला हज़रत के बाद भावुक हुई बरेली की फिज़ा, नम आंखों से घर लौटने लगे लाखों जायरीन; अगले साल फिर आने की उम्मीद लेकर रवाना
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उर्स-ए-आला हज़रत के बाद भावुक हुई बरेली की फिज़ा, नम आंखों से घर लौटने लगे लाखों जायरीन; अगले साल फिर आने की उम्मीद लेकर रवाना
रिपोर्ट/आसिफ अली
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काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मुहम्मद असजद रज़ा क़ादरी से इजाज़त लेकर लौट रहे अकीदतमंद, दरगाह पर हाजिरी का सिलसिला जारी
बरेली। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां फाजिले बरेलवी के उर्स में देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे लाखों अकीदतमंद अब नम आंखों के साथ बरेली से अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। उर्स के कुल शरीफ की रस्म पूरी होने के बाद जायरीनों की वापसी का सिलसिला तेज हो गया है। हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह आला हज़रत और जामियातुर रज़ा में ठहरे हुए हैं और अपनी सुविधा के अनुसार धीरे-धीरे रवाना हो रहे हैं।
उर्स में शामिल होने आए जायरीन वापसी से पहले दरगाह आला हज़रत पर हाजिरी दे रहे हैं। बड़ी संख्या में अकीदतमंद सज्जादानशीन और काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मुहम्मद असजद रज़ा क़ादरी (असजद मियां) से इजाज़त लेकर अपने घरों के लिए रवाना हो रहे हैं। दरगाह से विदाई के दौरान अकीदतमंदों के चेहरों पर भावुकता दिखाई दे रही है। कई जायरीन अगले साल फिर उर्स में शामिल होने की उम्मीद के साथ बरेली से विदा हो रहे हैं।
नम आंखों से विदाई, दिल में अगले साल फिर आने की तमन्ना
उर्स प्रभारी सलमान मियां ने बताया कि उर्स में देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे थे। कुल शरीफ के बाद अब अकीदतमंदों की वापसी शुरू हो गई है। जायरीन दरगाह पर सलामी पेश करने और सज्जादानशीन काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती असजद रज़ा क़ादरी (असजद मियां) से इजाज़त लेने के बाद अपने-अपने शहरों और देशों की ओर रवाना हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वापसी के दौरान अकीदतमंदों में भावुकता का माहौल है। लोग इस उम्मीद और दुआ के साथ बरेली से विदा हो रहे हैं कि जिंदगी रही तो अगले साल फिर आला हज़रत के उर्स में शिरकत करने पहुंचेंगे। हालांकि अभी भी काफी संख्या में जायरीन दरगाह और जामियातुर रज़ा में कयाम किए हुए हैं। ये लोग अपनी सुविधा और यात्रा के इंतजाम के मुताबिक आने वाले समय में रवाना होंगे।
उर्स के दौरान लाखों अकीदतमंद हुए सिलसिला-ए-आलिया कादरिया रज़विया से मुरीद
जमात रज़ा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया कि उर्स के दौरान लाखों की संख्या में अकीदतमंदों ने सिलसिला-ए-आलिया कादरिया रज़विया से मुरीद होकर अपनी अकीदत का इजहार किया। उर्स के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग बरेली पहुंचे।
उन्होंने कहा कि उर्स को कामयाबी और अमन-ओ-सुकून के साथ संपन्न कराने में बड़ी संख्या में लोगों ने दिन-रात मेहनत की। अलग-अलग ब्रांचों के कार्यकर्ताओं, वालंटियरों, लंगर और सबील लगाने वालों ने जायरीन की सहूलियत के लिए लगातार सेवाएं दीं।
लंगर, सबील से लेकर व्यवस्थाओं तक वालंटियरों ने संभाला मोर्चा
उर्स के दौरान बरेली में आने वाले लाखों जायरीन के लिए खान-पान, पानी, ठहरने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में बड़ी संख्या में वालंटियर जुटे रहे। जमात रज़ा मुस्तफा की विभिन्न ब्रांचों के कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर से जिम्मेदारियां संभालीं। लंगर और सबील लगाने वाले लोगों ने भी जायरीन की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फरमान मियां ने उर्स की व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी की मेहनत और टीमवर्क की वजह से उर्स का निजाम बेहतर से बेहतर बनाए रखने में मदद मिली।
इन लोगों का जताया गया विशेष आभार
उर्स की व्यवस्थाओं में योगदान देने वालों में डॉ. मेहंदी हसन, शमीम अहमद, हफीज इकराम, मोइन खान, अब्दुल्ला रज़ा खान, मोहम्मद जुनैद रज़ा, समरान खान, नदीम सुब्हानी मुंबई, कौसर अली, नवेद असलम, आमिल हुसैन, शाकिर रज़ा, यासीन खान सहित विभिन्न ब्रांचों के सदर और उनकी टीम के सदस्य शामिल रहे।
इसके अलावा ब्रांच सदर सैयद मशकूर अली, मुफ्ती कासिम साहब, अतीक खान, शाहिबुद्दीन रज़वी, अली रज़ा, रहबर रज़ा खां, फैजान खान, डॉ. जाफर खान, मुशाहिद खान, आरिफ रज़ा, शाहरुख रज़ा, आकिल खान, शावाब खान, अहसन खान, सलीम खान, मोहम्मद आसिम रज़ा अज़हरी, आले मुस्तफा, फरहान रज़ा अज़हरी, सिमनान खान, मोइन रज़ा, शाहबाज खान, अमान खान, डॉ. कलीम खान और आसिफ रज़ा समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का भी शुक्रिया अदा किया गया।
हेड ऑफिस से जुड़े कार्यकर्ताओं की भी अहम भूमिका
जमात रज़ा मुस्तफा के हेड ऑफिस से जुड़े मुकीम घोसी, बिलाल घोसी, अदनान रज़ा, मोसिन अल्वी, शरून अल्वी, सैयद इकरार अली, जुबैर नबी शानू, चच्चा, खुर्शीद खान, आमिर रज़ा, शहीद खान, जावेद रज़ा, कासिम रज़ा, मंजूर रज़ा और सलमान खान सहित तमाम कार्यकर्ताओं का भी विशेष रूप से आभार जताया गया।
उर्स प्रभारी सलमान मियां और फरमान मियां ने कहा कि उर्स-ए-आला हज़रत को बेहतर से बेहतरीन बनाने में सभी लोगों की मेहनत रंग लाई। उन्होंने कहा कि उर्स के दौरान जिस तरह से लोगों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, वह काबिले-तारीफ है।
जिला प्रशासन का भी जताया आभार
उर्स के शांतिपूर्ण और व्यवस्थित आयोजन के लिए उर्स प्रभारी सलमान मियां और फरमान मियां ने जिला प्रशासन का भी आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से एडीजी, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर निगम, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस-प्रशासन से जुड़े तमाम अधिकारियों एवं कर्मचारियों का शुक्रिया अदा किया।
उन्होंने कहा कि लाखों जायरीन की मौजूदगी वाले इतने बड़े आयोजन को बेहतर तरीके से संपन्न कराने में प्रशासन की व्यवस्थाओं और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुरक्षा, यातायात, सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में प्रशासनिक टीमों ने लगातार काम किया।
बरेली से विदा हो रहे जायरीन, लेकिन यादों में रहेगा उर्स
उर्स संपन्न होने के बाद अब बरेली की सड़कों पर घर वापसी करते जायरीन नजर आ रहे हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों की ओर अकीदतमंदों की आवाजाही बढ़ गई है।
कई जायरीन अपने साथ उर्स की यादें लेकर लौट रहे हैं।
दरगाह पर हाजिरी और सलामी पेश करने के बाद जब जायरीन बरेली से रवाना हो रहे हैं तो माहौल भावुक दिखाई दे रहा है। अकीदतमंदों के बीच एक ही उम्मीद और तमन्ना नजर आ रही है—अगले साल फिर बरेली आकर आला हज़रत की बारगाह में हाजिरी देने की।
उर्स की रस्में पूरी होने के बाद भी दरगाह और आसपास के इलाकों में अकीदतमंदों की मौजूदगी बनी हुई है। जो लोग अभी ठहरे हुए हैं, वे अपनी यात्रा की सुविधा के अनुसार धीरे-धीरे घरों की ओर रवाना होंगे।
इस तरह उर्स-ए-आला हज़रत का यह आयोजन अपने पीछे अकीदत, रूहानी माहौल, सेवा, भाईचारे और व्यवस्थाओं की कई यादें छोड़ गया है, जबकि जायरीन अब अगले साल फिर उसी अकीदत और उम्मीद के साथ बरेली लौटने का इरादा लेकर अपने घरों की ओर बढ़ रहे हैं।