108वें उर्स-ए-रजवी कुल शरीफ के साथ तीन दिवसीय कार्यक्रम समापन, दुआ में उठे लाखो हाथ देश मे अमन चैन की दुआ हुई
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108वें उर्स-ए-रजवी कुल शरीफ के साथ तीन दिवसीय कार्यक्रम समापन, दुआ में उठे लाखो हाथ
देश मे अमन चैन की दुआ हुई
रिपोर्ट/आसिफ अली
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बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के 108वें उर्स-ए-रजवी का शनिवार दोपहर 2:38 बजे कुल शरीफ की रस्म के साथ समापन हो गया। कुल शरीफ की खास घड़ी में इस्लामिया कॉलेज मैदान, दरगाह आला हजरत और आसपास का पूरा इलाका अकीदतमंदों से भर गया।
देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे जायरीन ने कुल शरीफ में शिरकत की और आला हजरत को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
कुल के दौरान जब सज्जादानशीन और उलमा ने मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए दुआ कराई तो हजारों लोगों ने एक साथ हाथ उठाकर आमीन कहा। इस दौरान पूरा क्षेत्र दुआ और आमीन की सदाओं से गूंज उठा।
सुबह से ही दरगाह और इस्लामिया मैदान की ओर बढ़ता रहा जायरीन का रेला
उर्स-ए-रजवी के अंतिम दिन सुबह से ही दरगाह आला हजरत और इस्लामिया कॉलेज मैदान की ओर जायरीन का पहुंचना शुरू हो गया था। प्रमुख मार्गों और आसपास की गलियों में अकीदतमंदों की भारी भीड़ नजर आई। कुल शरीफ के समय इस्लामिया मैदान से लेकर दरगाह आला हजरत तक बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद रहे।
देश के अलग-अलग राज्यों के साथ ही विदेशों से आए अकीदतमंदों ने भी कुल शरीफ में हिस्सा लिया। लोगों ने आला हजरत की दीनी और रूहानी सेवाओं को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि और खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
कुरानख्वानी से शुरू हुआ उर्स का आखिरी दिन
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी के अनुसार, उर्स के अंतिम दिन की शुरुआत सुबह करीब छह बजे कुरानख्वानी से हुई। इसके बाद सुबह आठ बजे महफिल का आयोजन किया गया। इसमें देश और विदेश से आए सज्जादगान, उलमा और धार्मिक विद्वानों ने तकरीरें कीं।
महफिल में नात-ओ-मनकबत का सिलसिला भी जारी रहा। वक्ताओं ने आला हजरत इमाम अहमद रजा खां की दीनी, इल्मी और रूहानी खिदमात पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद दोपहर 2:38 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। कुल के साथ ही तीन दिनों से चल रहे उर्स-ए-रजवी का विधिवत समापन हो गया।
शुक्रवार रात से भोर तक चला जलसा
उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार रात इस्लामिया कॉलेज मैदान में विशाल जलसे का आयोजन किया गया। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मुफ्ती कारी नाजिर तहसीनी ने तिलावत-ए-कुरान से की।
जलसे में देश-विदेश से आए उलमा ने इस्लाम के धार्मिक कर्तव्यों, पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं, मसलक-ए-आला हजरत और मुफ्ती आजम हिंद की दीनी सेवाओं पर प्रकाश डाला।
उलमा ने अकीदतमंदों से कुरान और पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं के मुताबिक जिंदगी गुजारने तथा अपने धार्मिक कर्तव्यों को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाने की अपील की।
मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ में भी उमड़ी भीड़
शुक्रवार देर रात मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें भी बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद शामिल हुए। उलमा ने मुफ्ती आजम हिंद की दीनी और सामाजिक सेवाओं तथा उनके फतवों का जिक्र किया।
इसके बाद सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने विशेष दुआ कराई। कार्यक्रम देर रात से भोर तक चलता रहा। दरगाह प्रमुख के पौत्र अहसान रजा खान ने आला हजरत और मुफ्ती आजम हिंद की दीनी व रूहानी सेवाओं पर प्रकाश डाला।
मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान का संदेश पढ़कर सुनाया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कई उलमा ने भी तकरीरें कीं।
कुल शरीफ से पहले DM और SSP ने पैदल किया सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण
उर्स-ए-रजवी के अंतिम दिन कुल शरीफ में जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। जिलाधिकारी अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य ने अधिकारियों के साथ पैदल गश्त कर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का जायजा लिया।
अधिकारियों ने इस्लामिया कॉलेज मैदान, दरगाह मार्ग, बिहारीपुर चौकी, इस्लामिया मार्केट और पटेल चौक सहित कई प्रमुख स्थानों का निरीक्षण किया। संवेदनशील स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाए और भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही न हो।
निरीक्षण के दौरान एसपी सिटी मानुष पारीक, एसपी ट्रैफिक अकमल खान, एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी और सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार वर्मा समेत पुलिस-प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कुल के बाद शुरू हुआ जायरीन की वापसी का सिलसिला
कुल शरीफ की रस्म पूरी होने के साथ ही तीन दिवसीय उर्स-ए-रजवी 2026 का समापन हो गया। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों से आए जायरीन के वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और यातायात विभाग की टीमें प्रमुख मार्गों पर तैनात रहीं। तीन दिनों तक बरेली में धार्मिक आस्था, अकीदत और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। कुल शरीफ की दुआ के साथ उर्स का समापन हुआ और अकीदतमंद अपने-अपने घरों की ओर रवाना होने लगे।