बरेली में बसपा को झटका, पूर्व जिला उपाध्यक्ष शरीफ अली ने प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा,

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बरेली में बसपा को झटका, पूर्व जिला उपाध्यक्ष शरीफ अली ने प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा,

रिपोर्ट/आसिफ अली

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मायावती को पत्र, बोले – पार्टी भटकी ‘सर्वजन हिताय’ की राह पर, मुस्लिम मुद्दों पर मुखरता नहीं

BSP Resignation: बसपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष शरीफ अली का इस्तीफा, मायावती को भेजा पत्र, आरोप – ‘बहुजन हिताय’ छोड़ी, ‘सर्वजन हिताय’ अपनाई, अल्पसंख्यक-मुस्लिम मुद्दों पर कमजोर हुई पार्टी, कहा सिद्धांतों से समझौता नहीं

बरेली बहुजन समाज पार्टी को बरेली में बड़ा झटका लगा है। बसपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष मो. शरीफ अली ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को संबोधित कर जिला अध्यक्ष बरेली के माध्यम से सौंपा है।

शरीफ अली का इस्तीफा: पीड़ा और वैचारिक मंथन के बाद लिया फैसला अपने इस्तीफा पत्र में शरीफ अली ने लिखा कि यह निर्णय उन्होंने अत्यंत पीड़ा और गंभीर वैचारिक मंथन के बाद लिया है। उन्होंने याद दिलाया कि बसपा की स्थापना मान्यवर कांशीराम साहब ने ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के उद्देश्य से की थी। मकसद था समाज के वंचित, शोषित, दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्गों को सम्मान, अधिकार और राजनीतिक भागीदारी दिलाना।

आरोप: बसपा मूल वैचारिक उद्देश्य से भटकी, ‘सर्वजन हिताय’ ने कमजोर किया आंदोलन*
शरीफ अली ने सीधा आरोप लगाया कि वर्तमान समय में पार्टी अपने मूल वैचारिक उद्देश्यों से भटकती दिख रही है। उनके मुताबिक ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ की भावना के स्थान पर अब ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति को प्राथमिकता दी जा रही है। शरीफ अली ने कहा कि इसी वजह से बहुजन आंदोलन की वैचारिक धार कमजोर हुई है।

मुस्लिम-अल्पसंख्यक मुद्दों पर सवाल: पार्टी नहीं रख पाई मुखरता इस्तीफे में शरीफ अली ने विशेष रूप से अल्पसंख्यक समाज, खासकर मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी गंभीर समस्याओं और घटनाओं पर पार्टी अपेक्षित मजबूती और मुखरता से अपनी बात नहीं रख सकी। शरीफ अली ने लिखा कि सामाजिक न्याय का संघर्ष तभी सार्थक है, जब हर शोषित, वंचित और उत्पीड़ित वर्ग की आवाज को सम्मानपूर्वक बुलंद किया जाए।

‘यह व्यक्तिगत कारण से नहीं, सिद्धांतों की लड़ाई है’ शरीफ अली ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं है। यह उनके वैचारिक सिद्धांतों, सामाजिक न्याय, संविधान और बहुजन महापुरुषों के मिशन के प्रति प्रतिबद्धता के कारण है। इस्तीफे के बाद भी उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे भविष्य में भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, मान्यवर कांशीराम साहब तथा बहुजन महापुरुषों के विचारों और सामाजिक न्याय के मिशन के लिए काम करते रहेंगे।

अंत में शरीफ अली ने पार्टी से अपने इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की मांग की है।

शरीफ अली के इस्तीफे के बाद बरेली में बसपा के अंदर की राजनीति गरमा सकती है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस इस्तीफे पर क्या रुख अपनाता है।