गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रत्येक गौशाला में गोबर गैस प्लांट स्थापित किए जाए…
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गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रत्येक गौशाला में गोबर गैस प्लांट स्थापित किए जाए…
रिपोर्ट/आसिफ अली
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प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दुग्ध समिति का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए…
लखनऊ: आज विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को गौशालाओं के अवस्थापना संबंधी कार्य अक्टूबर 2026 तक प्रत्येक दशा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी कार्यों को पूर्ण किया जाए। अवस्थापना कार्यों में लापरवाही या अनियमितता बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगी और ऐसा करने पर संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
समीक्षा बैठक में निर्देशित किया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक पशु चिकित्सालय की स्थापना के लिए संबंधित विधायकों से प्रस्ताव प्राप्त किए जाएं तथा आवश्यक कार्यवाही समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को प्रदेश की गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करने तथा यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि वहां स्थापित भूसा बैंकों में पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध हो, ताकि वर्षपर्यंत भूसे की कोई कमी न हो। साथ ही पशुओं के लिए हरे चारे की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
आगामी वर्षा ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए वृहद गौ संरक्षण केन्द्रों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए। डेयरी व्यवसाय और पशुपालन किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है और सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक गौशाला में गोबर गैस प्लांट स्थापित किए जाने के निर्देश भी दिए। दुग्ध सहकारिता को सुदृढ़ बनाने पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में दुग्ध समिति का गठन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा दुग्ध उत्पादक किसानों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा। विभागीय अधिकारियों को पशुधन से जुड़े सभी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए। निराश्रित गोंवश संरक्षण हेतु भूसे के प्रबंधन, हरे चारे के बुआई की स्थिति, संचारी रोग, टीकाकरण के लक्ष्य तथा दुग्ध समितियों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए।