बरेली में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का हल्ला बोल: लंबित मांगों पर सरकार को अल्टीमेटम,बड़े आंदोलन की चेतावनी*

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बरेली में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का हल्ला बोल: लंबित मांगों पर सरकार को अल्टीमेटम,बड़े आंदोलन की चेतावनी*

रिपोर्ट/आसिफ अली

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*डीएम को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, बोलीं- 30 अप्रैल की डेडलाइन खत्म, अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए समाधान*

*बरेली, 30 अप्रैल 2026:* बरेली में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के बैनर तले हजारों कार्यकत्रियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। लंबित मांगों पर तुरंत फैसला न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

*8 मार्च को मिला था 30 अप्रैल तक का वादा, डेडलाइन खत्म*
प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि मौर्या, शशिबाला और सुषमा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि 8 मार्च 2026 महिला दिवस पर सरकार से वार्ता हुई थी। तब 30 अप्रैल तक समस्याओं के समाधान का आश्वासन मिला था। लेकिन समयसीमा बीतने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं आया। कार्यकत्रियों का कहना है कि वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से मांग उठा रहे हैं, पर हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है।

*योजनाएं चलाने वाली खुद परेशान, इलाज तक को पैसे नहीं*
ज्ञापन में बताया गया कि महिला एवं बाल विकास की सभी योजनाएं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां ही जमीन पर उतारती हैं। कुपोषण से लड़ने वाली महिलाएं खुद आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझ रही हैं। कई कार्यकत्रियां समय से पहले बीमार हो गई हैं, लेकिन इलाज कराने तक के पैसे नहीं हैं।

*ये हैं 10 बड़ी मांगें*
आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा ने सरकार के सामने ये प्रमुख मांगें रखी हैं:

1. *पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा* दिया जाए
2. *वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी, महंगाई भत्ता और मेडिकल अवकाश* लागू हो
3. *सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष* की जाए
4. *पदोन्नति प्रक्रिया नियमित और पारदर्शी* बने
5. *पोषण ट्रैकर के लिए 20,000 रुपये मोबाइल सहायता* और *₹2,500 मासिक डाटा भत्ता* मिले
6. *प्रोत्साहन राशि PLI को मानदेय में शामिल* किया जाए
7. *आंगनबाड़ी केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं* सुनिश्चित हों
8. *अन्य विभागों का काम जबरन न थोपा जाए*
9. *मानदेय कटौती, उत्पीड़न और सेवा समाप्ति पर रोक* लगे
10. *बैठकों में भागीदारी के लिए टीए/डीए* दिया जाए

*विश्वास बचाने का अंतिम प्रयास*
मोर्चा ने साफ किया कि यह आंदोलन सरकार के विरोध में नहीं, अपने अधिकारों के लिए है। लेकिन अगर इस बार भी अनदेखी हुई तो धरना-प्रदर्शन बड़े जनआंदोलन में बदल जाएगा। ज्ञापन में कहा गया कि यह “विश्वास बचाने का अंतिम प्रयास” है। सरकार से न्यायपूर्ण निर्णय की उम्मीद है।