9 साल में अमीरों की 12.3 लाख करोड़ की कर्ज माफी पर संसद में सवाल
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9 साल में अमीरों की 12.3 लाख करोड़ की कर्ज माफी पर संसद में सवाल
रिपोर्ट /आसिफ अली
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बरेली /लोकसभा में आंवला सांसद नीरज मौर्य द्वारा पूछे गए एक तीखे सवाल ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्ज माफी नीति पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
सांसद ने बताया कि पिछले नौ वर्षों में सरकारी बैंकों ने करीब 12.3 लाख करोड़ रुपये के ऋण बट्टे खाते में डाल दिए हैं। उन्होंने इस फैसले के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां किसान, छोटे व्यापारी, मध्यम वर्ग और गरीब छात्र छोटे-छोटे कर्ज के लिए परेशान हैं, वहीं बड़े कॉरपोरेट और अमीर कर्जदारों को राहत दी जा रही है।
वित्त मंत्रालय की ओर से राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सदन में जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में ही 35,096 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते में डाला गया। सांसद मौर्य ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पूछा कि जब बैंकों की स्थिति मजबूत हो रही है और एनपीए में कमी आ रही है, तब इतनी बड़ी राशि को माफ करने का क्या तर्क है।
सरकार ने इसे तकनीकी और लेखांकन प्रक्रिया बताया, लेकिन सांसद ने कहा कि इसका सीधा लाभ बड़े बकायेदारों को मिलता है। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि भविष्य में इस तरह की कर्ज माफी को रोकने और कर्ज मूल्यांकन प्रक्रिया को सख्त करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने आईबीसी और अन्य सुधारों का हवाला दिया, लेकिन सांसद ने इनके जमीनी प्रभाव पर सवाल खड़े किए। सांसद मौर्य ने कहा कि कर्ज के दबाव में किसान आत्महत्या तक कर रहे हैं, ऐसे में अमीरों की कर्ज माफी सामाजिक अन्याय है।