भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम

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भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम

रिपोर्ट/आसिफ अली

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दिल्ली /प्रधानमंत्री मोदी की पहल से एमएसएमई, ऊर्जा, रक्षा और निर्यात क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता वैश्विक स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते के माध्यम से लगभग 200 करोड़ लोगों की आबादी वाले देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और यह विश्व की लगभग एक चौथाई जीडीपी को प्रभावित करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर केवल भारत और यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

यूरोपीय संघ की अध्यक्षा उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे अब तक का सबसे महत्वपूर्ण और भविष्य को आकार देने वाला व्यापार समझौता बताया है।

उनका कहना है कि भारत एक मजबूत, लोकतांत्रिक और विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह समझौता भारत-यूरोप के बीच तकनीकी सहयोग को भी नई मजबूती देगा।

गौरतलब है कि भारत इस व्यापार समझौते के लिए वर्ष 2007 से प्रयास कर रहा था, लेकिन 2013 में यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब यह पहल न केवल पुनः शुरू हुई है, बल्कि वैश्विक आर्थिक और सामाजिक दिशा बदलने की क्षमता भी रखती है।

इस समझौते से भारत के एमएसएमई सेक्टर, ऊर्जा, पेट्रो-गैस, समुद्री संसाधन, रक्षा उत्पादन और निर्माण क्षेत्र को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही वस्त्र उद्योग, आभूषण, चमड़ा उद्योग और खाद्य उत्पादों के निर्यात को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा। आने वाले समय में भारत के लिए 50 से अधिक देशों के बाजारों तक व्यापारिक पहुंच आसान हो सकती है, जिससे देश में समृद्धि और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और भारत की अर्थव्यवस्था को तेज़ गति से आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। ऐसे समय में, जब विश्व अमेरिका और चीन की व्यापार नीतियों को लेकर असमंजस में है, भारत-यूरोपीय संघ सहयोग वैश्विक स्थिरता का नया विकल्प बन सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसे “Mother of All Deals” कहा जाना इसकी व्यापकता और महत्व को दर्शाता है। इस पहल से विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा, विश्वसनीयता और नेतृत्व क्षमता और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।