बरेली में एनएचएआई भूमि अधिग्रहण का बड़ा विवाद हाईकोर्ट से राहत

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बरेली में एनएचएआई भूमि अधिग्रहण का बड़ा विवाद हाईकोर्ट से राहत

रिपोर्ट/आसिफ अली

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प्रतिकर वापसी आदेश पर लगी रोक, जिलाधिकारी से वसूली स्थगित करने की मांग

बरेली।राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत ग्राम महेशपुर ठाकुरान, तहसील व जिला बरेली में भूमि अधिग्रहण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है।

भूमि गाटा संख्या-517 से संबंधित प्रतिकर राशि की वापसी को लेकर उपजे विवाद में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने प्रार्थिनी के पक्ष में अंतरिम राहत प्रदान की है।

मामले के अनुसार, भगवानदेई पत्नी नरेश कुमार ने वर्ष 2020 में सहखातेदार यशपाल सिंह और देशपाल सिंह से विधिवत पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से गाटा संख्या-517 की 0.3160 हेक्टेयर भूमि क्रय की थी।

इसके बाद सक्षम राजस्व प्राधिकारी द्वारा नामांतरण आदेश पारित कर प्रार्थिनी का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया।

बाद में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के अंतर्गत गाटा संख्या-517 की कुल 0.8953 हेक्टेयर भूमि एनएचएआई के लिए अधिग्रहित की गई, जिस पर सहखातेदारों के अंशानुसार प्रतिकर राशि निर्गत की गई।

इसी क्रम में प्रार्थिनी को भी उनके हिस्से का प्रतिकर भुगतान किया गया।

विभाजन वाद बना विवाद की जड़ सहखातेदारों द्वारा बाद में दाखिल किए गए विभाजन वाद को लेकर विवाद गहरा गया।

प्रार्थिनी का आरोप है कि यह विभाजन वाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को पक्षकार बनाए बिना दाखिल किया गया, जिससे वह अवैध और विधि-शून्य है।

इसके बावजूद विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी द्वारा दिनांक 21 नवंबर 2025 को प्रतिकर राशि वापस लिए जाने का आदेश पारित कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत प्रार्थिनी ने उक्त आदेश को उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट याचिका संख्या 1640/2026 के माध्यम से चुनौती दी। माननीय उच्च न्यायालय ने 20 जनवरी 2026 को प्रारंभिक सुनवाई के उपरांत प्रतिकर राशि की वसूली संबंधी आदेश पर अस्थाई रोक लगा दी।

इसके अतिरिक्त, विभाजन वाद से जुड़े प्रकरण में अपर आयुक्त (न्यायिक), बरेली मंडल द्वारा भी गाटा संख्या-517 पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश पारित किए जा चुके हैं।

जिलाधिकारी से की गई मांग इन सभी तथ्यों के आधार पर प्रार्थिनी ने जिलाधिकारी बरेली को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए प्रतिकर वसूली की समस्त कार्यवाही को स्थगित किए जाने की मांग की है, जब तक कि सक्षम न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय न आ जाए।

संलग्न दस्तावेज प्रार्थना पत्र के साथ निगरानी वाद, स्थगन आदेश तथा हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।

अब इस मामले पर प्रशासन और न्यायिक निर्णय की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।