बरेली सपा जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप की छुट्टी, पूरी जिला कमेटी भंग लगातार शिकायतें क़े चलते गिरीगाज

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बरेली सपा जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप की छुट्टी, पूरी जिला कमेटी भंग लगातार शिकायतें क़े चलते गिरीगाज

रिपोर्ट /आसिफ अली

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कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और चुनावी लापरवाही बनी कारण, हाईकमान ने दिया सख्त संदेश

बरेली।समाजवादी पार्टी हाईकमान ने बरेली संगठन में लंबे समय से चल रही गुटबाजी, निष्क्रियता और आंतरिक कलह को लेकर आखिरकार बड़ा और निर्णायक कदम उठा लिया है।

सपा जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप को पद से हटाते हुए पूरी जिला कमेटी को भंग कर दिया गया। इस कार्रवाई से जिले की सियासत में भूचाल आ गया है।

लखनऊ पार्टी सूत्रों के मुताबिक शिवचरण कश्यप के खिलाफ बीते काफी समय से लगातार शिकायतें हाईकमान तक पहुंच रही थीं।

उन पर संगठन को एकजुट रखने में विफल रहने, गुटबाजी को बढ़ावा देने, नियमित संगठनात्मक बैठकों में लापरवाही बरतने और जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा जैसे गंभीर आरोप थे।

कहा जा रहा है कि कई वरिष्ठ नेताओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं ने संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर खुलकर नाराजगी जताई थी।

सूत्र बताते हैं कि जिलाध्यक्ष रहते हुए शिवचरण कश्यप के कार्यकाल में संगठन की गतिविधियां ठप होती चली गईं।

चुनावी तैयारियों में ढिलाई, कार्यकर्ताओं से संवाद की कमी और आपसी खींचतान के चलते पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर होती गई, जिसका असर हालिया राजनीतिक गतिविधियों में भी साफ नजर आया।

बताया जा रहा है कि बरेली जनपद में उपचुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व अब किसी भी तरह की संगठनात्मक कमजोरी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

इसी रणनीति के तहत हाईकमान ने साफ संदेश देते हुए न सिर्फ जिलाध्यक्ष को हटाया, बल्कि पूरी जिला कमेटी को भंग कर नए सिरे से संगठन खड़ा करने का फैसला लिया है।

सपा नेतृत्व का मानना है कि इस सख्त कदम से बरेली में फैली गुटबाजी पर रोक लगेगी और कार्यकर्ताओं में नया जोश और भरोसा पैदा होगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार जल्द ही अंतरिम प्रभारी की नियुक्ति कर नई जिला कमेटी के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इस फैसले के बाद बरेली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सपा खेमे में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है, वहीं शिवचरण कश्यप की कार्यशैली को लेकर अंदरखाने कई सवाल भी उठने लगे हैं।

साफ है कि सपा हाईकमान अब संगठन में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।