MJPRU का 24वां दीक्षांत समारोह: खराब मौसम के कारण बरेली नहीं पहुंच सकीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, ऑनलाइन जुड़कर मेधावियों को दी शुभकामनाएं

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MJPRU का 24वां दीक्षांत समारोह: खराब मौसम के कारण बरेली नहीं पहुंच सकीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, ऑनलाइन जुड़कर मेधावियों को दी शुभकामनाएं

रिपोर्ट/आसिफ अली

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बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJPRU) का 24वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के कारण उनका बरेली आना संभव नहीं हो सका। इसके बाद वह ऑनलाइन माध्यम से दीक्षांत समारोह से जुड़ीं और मेधावी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राज्यपाल ने अपने ऑनलाइन संबोधन में विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी है। उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश के विकास में करने का आह्वान किया।

राज्यपाल के ऑनलाइन संबोधन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दीक्षांत समारोह संपन्न कराया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह, मुख्य अतिथि डॉ. राकेश कुमार तथा सांसद छत्रपाल गंगवार ने संयुक्त रूप से मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए। पूरे समारोह के दौरान विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों में उत्साह का माहौल बना रहा।

82 मेधावियों को मंच पर बुलाकर किया गया सम्मानित

राज्यपाल के बरेली नहीं पहुंच पाने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम में बदलाव किया। पहले केवल 24 मेधावियों को मंच पर सम्मानित किया जाना था, लेकिन बाद में निर्णय लिया गया कि सभी 82 स्वर्ण पदक विजेता छात्र-छात्राओं को मंच पर बुलाकर उपाधि और गोल्ड मेडल प्रदान किए जाएंगे।

विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 82 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल मिला। इनमें 69 छात्राएं और 13 छात्र शामिल रहे। छात्राओं का शानदार प्रदर्शन एक बार फिर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों में प्रमुख आकर्षण बना।

उपाधि मिलते ही खुशी से खिल उठे मेधावियों के चेहरे

मंच पर सम्मानित होते ही विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कई छात्र-छात्राओं ने इसे अपने जीवन का सबसे गौरवपूर्ण और यादगार क्षण बताया। अभिभावकों ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों का आभार जताया।

कुलपति ने कहा— यह नई शुरुआत का अवसर

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवा तैयार करना है, जो ज्ञान, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ देश के विकास में योगदान दें।

मुख्य अतिथि और सांसद ने दी सफलता की शुभकामनाएं

मुख्य अतिथि डॉ. राकेश कुमार ने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने का संदेश दिया। वहीं सांसद छत्रपाल गंगवार ने सभी मेधावियों को बधाई देते हुए कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और उन्हें अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में करना चाहिए।

दीक्षांत समारोह में दिखा उत्साह का माहौल

दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, अभिभावक और विश्वविद्यालय के अधिकारी मौजूद रहे। जैसे ही विद्यार्थियों ने मंच पर उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त किए, पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। समारोह के बाद विद्यार्थियों और उनके परिवारों ने परिसर में यादगार तस्वीरें भी खिंचवाईं।

छात्राओं का रहा दबदबा

इस वर्ष भी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्राओं का प्रदर्शन सबसे अधिक प्रभावशाली रहा। कुल 82 स्वर्ण पदक विजेताओं में 69 छात्राओं का शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।

नई उम्मीदों और जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़े विद्यार्थी

दीक्षांत समारोह के समापन के साथ हजारों विद्यार्थियों ने अपने शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया। अब विश्वविद्यालय से प्राप्त उपाधियां उन्हें रोजगार, शोध और उच्च शिक्षा के नए अवसरों की ओर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेंगी। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ और सभी मेधावियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।