फरीदपुर में प्रसव के बाद नवजात की मौत से मर्सी अस्पताल में बवाल, परिजनों का हंगामा; संचालक हिरासत में

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फरीदपुर में प्रसव के बाद नवजात की मौत से मर्सी अस्पताल में बवाल, परिजनों का हंगामा; संचालक हिरासत में

फरीदपुर के बड़े बाइपास स्थित अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप, बिना प्रशिक्षित डॉक्टर प्रसव कराने का दावा; स्वास्थ्य विभाग की जांच में डॉक्टर और स्टाफ नहीं मिले, अस्पताल सील

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बरेली/फरीदपुर। बरेली के फरीदपुर कस्बे में बड़े बाइपास स्थित मर्सी अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात की मौत का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया। फरीदपुर के मर्सी अस्पताल में नवजात की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल संचालक अली अब्बास जैदी पर इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना है कि प्रशिक्षित चिकित्सक की मौजूदगी के बिना प्रसव कराया गया और नवजात की हालत बिगड़ने के बाद भी समय पर जरूरी उपचार नहीं दिया गया।

मामले की सूचना मिलते ही फरीदपुर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मर्सी अस्पताल पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की जांच में अस्पताल में पंजीकृत डॉक्टर और अन्य स्टाफ मौके पर मौजूद नहीं मिले। जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने फरीदपुर के मर्सी अस्पताल को सील कर दिया। वहीं पुलिस ने अस्पताल संचालक अली अब्बास जैदी को हिरासत में लिया है। नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

फरीदपुर में शनिवार को अस्पताल में भर्ती हुई थी महिला

फरीदपुर के मोहल्ला फर्रखपुर निवासी सचिन गुप्ता ने बताया कि उन्होंने शनिवार को अपनी 22 वर्षीय पत्नी मुस्कान को प्रसव के लिए मर्सी अस्पताल फरीदपुर में भर्ती कराया था। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में उस समय कोई प्रशिक्षित डॉक्टर मौजूद नहीं था।

परिजनों के मुताबिक इसके बावजूद अस्पताल संचालक अली अब्बास जैदी ने खुद महिला का प्रसव कराया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि संचालक के पास मेडिकल डिग्री नहीं है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

फरीदपुर के अस्पताल में प्रसव के बाद बिगड़ी नवजात की हालत

परिजनों के अनुसार प्रसव के बाद मंगलवार को नवजात की तबीयत अचानक खराब हो गई। नवजात को सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिवार का आरोप है कि हालत गंभीर होने के बावजूद मर्सी अस्पताल में नवजात को समय पर ऑक्सीजन और जरूरी उपचार नहीं दिया गया।

इसके कुछ समय बाद नवजात ने दम तोड़ दिया। नवजात की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन अस्पताल पहुंचे और संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

फरीदपुर में हंगामे के बीच संचालक के भागने की कोशिश का आरोप

मर्सी अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलते ही फरीदपुर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने अस्पताल संचालक से पूछताछ शुरू की।

पुलिस के अनुसार इसी दौरान अस्पताल संचालक ने वहां से निकलने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।

नवजात की मां मुस्कान के परिजनों ने संचालक अली अब्बास जैदी के खिलाफ थाने में नामजद तहरीर दी है। पुलिस ने नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

जांच में फरीदपुर के मर्सी अस्पताल में नहीं मिले डॉक्टर और स्टाफ

मामला सामने आने के बाद फरीदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम भी मर्सी अस्पताल पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, दस्तावेजों और स्टाफ की मौजूदगी की जांच की।

जांच के दौरान अस्पताल में पंजीकृत डॉक्टर और अन्य स्टाफ मौके पर नहीं मिले। स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में कई अनियमितताएं भी मिलीं। इसके बाद टीम ने फरीदपुर स्थित मर्सी अस्पताल को सील कर दिया।

सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुराग गौतम ने बताया कि अस्पताल में अनियमितता मिलने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई है। अस्पताल में भर्ती पांच मरीजों को फरीदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शिफ्ट कराया गया है।

फरीदपुर के मर्सी अस्पताल पर पहले भी उठे थे सवाल

मर्सी अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की मौजूदा कार्रवाई के बीच अस्पताल के दस्तावेजों से जुड़ा पुराना मामला भी सामने आया है। बताया गया कि सात अगस्त को झोलाछाप नियंत्रण सेल की प्रभारी डॉ. सुचिता गंगवार ने फरीदपुर के मर्सी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था।

उस दौरान अस्पताल संचालक मौके पर पंजीकरण से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका था। स्वास्थ्य विभाग ने उसे तीन दिन के भीतर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस दिया था।

डॉ. सुचिता गंगवार के मुताबिक नोटिस का जवाब देने के लिए संचालक खुद उपस्थित नहीं हुआ। अस्पताल की ओर से कुछ दस्तावेज भेजे गए थे, लेकिन उनमें राशिद अली का नाम दर्ज था।

ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी देखा जाएगा कि फरीदपुर के इस अस्पताल में वास्तव में कौन से डॉक्टर सेवाएं दे रहे थे और पंजीकरण में दर्ज डॉक्टरों की अस्पताल में मौजूदगी कितनी थी।

पंजीकरण होने के बावजूद मानकों की होगी जांच

डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद अंसारी ने बताया कि मर्सी अस्पताल फरीदपुर का स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण है। हालांकि नवजात की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी।

जांच में पंजीकरण के समय पैनल में शामिल डॉक्टरों की जानकारी, उनकी अस्पताल में मौजूदगी और इलाज से जुड़े अन्य मानकों की जांच की जाएगी। अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी नवजात की मौत की वजह

सीओ फरीदपुर संदीप सिंह ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर अस्पताल संचालक अली अब्बास जैदी को हिरासत में लिया गया है। नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

अब फरीदपुर नवजात मौत मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की जांच अहम होगी। नवजात की मौत के पीछे इलाज में लापरवाही थी या कोई चिकित्सकीय कारण, इसका पता जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फिलहाल फरीदपुर में सामने आए इस मामले ने निजी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था, डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की सीलिंग कार्रवाई और पुलिस हिरासत के बाद अब सबकी नजर जांच की अगली कार्रवाई पर है।