गन्ना उत्पादक महाविद्यालय, बहेड़ी में रुद्राक्ष के पौधों का वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
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गन्ना उत्पादक महाविद्यालय, बहेड़ी में रुद्राक्ष के पौधों का वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
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रिपोर्ट/आसिफ अली
बहेड़ी। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से गन्ना उत्पादक महाविद्यालय, बहेड़ी के परिसर में रुद्राक्ष के पौधों का वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने पौधारोपण कर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा महाविद्यालय परिसर को हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाना था।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन जैसी चुनौतियाँ मानव जीवन के लिए गंभीर संकट बन चुकी हैं। ऐसे में वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन की सुरक्षा का प्रभावी माध्यम है।
इस अवसर पर रुद्राक्ष के वृक्ष के धार्मिक, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि रुद्राक्ष (Elaeocarpus ganitrus) का वृक्ष वातावरण को शुद्ध करने, कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करने, ऑक्सीजन प्रदान करने, जैव विविधता को बढ़ावा देने तथा मिट्टी के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष को भगवान शिव से जुड़ा पवित्र वृक्ष माना जाता है और इसका आध्यात्मिक एवं आयुर्वेदिक महत्व भी अत्यंत विशेष है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरिकेश सिंह ने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण मानव अस्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। रुद्राक्ष जैसे उपयोगी एवं पवित्र वृक्षों का रोपण प्रकृति और संस्कृति दोनों के संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
प्रो डॉ. सुरेखा पिपलानी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। यदि युवा पीढ़ी प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनेगी, तो देश का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और हरित होगा।
प्रो डॉ सचिन्द्र मोहन शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वृक्ष मानव जीवन के सच्चे मित्र हैं। वे निःस्वार्थ भाव से हमें प्राणवायु, छाया, फल और स्वच्छ वातावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प लेना चाहिए।
डॉ. मोहित भारद्वाज ने कहा कि रुद्राक्ष का वृक्ष भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रही है, तब ऐसे वृक्षों का रोपण भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में लगाया गया प्रत्येक पौधा विद्यार्थियों को यह संदेश देगा कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव सभ्यता का संरक्षण है तथा पर्यावरण की रक्षा पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
डॉ भावेश मिश्रा ने कहा कि आज आवश्यकता केवल पौधे लगाने की नहीं, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने की है। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधे के संरक्षण का संकल्प ले ले, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य स्वतः ही साकार हो जाएगा।
डॉ. रविंद्र गंगवार ने कहा, “प्रकृति और मानव जीवन का संबंध एक-दूसरे के पूरक का है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। आज बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन हम सभी के लिए गंभीर चुनौती हैं। ऐसे समय में रुद्राक्ष जैसे उपयोगी वृक्षों का रोपण न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह समाज को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी बोध कराता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।”
डॉ. योगेंद्र यादव ने कहा, “वृक्ष केवल ऑक्सीजन देने वाले पौधे नहीं, बल्कि पृथ्वी के जीवन-चक्र के आधार स्तंभ हैं। जल संरक्षण, जैव विविधता, स्वच्छ वायु और संतुलित जलवायु का आधार वृक्ष ही हैं। यदि हम आज पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लें, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भारत का उपहार दे सकते हैं। वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा, जब प्रत्येक लगाया गया पौधा एक विशाल वृक्ष बनकर समाज की सेवा करे।”
डॉ. सीमा डालाकोटी ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल वैज्ञानिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दायित्व भी है। शिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी है। रुद्राक्ष जैसे पवित्र एवं पर्यावरण हितैषी वृक्षों का रोपण हमें यह संदेश देता है कि विकास तभी सार्थक है, जब वह प्रकृति के संरक्षण के साथ आगे बढ़े।”
डॉ चंद्रशेखर यादव ने कहा कि प्रकृति हमें जीवन प्रदान करती है और वृक्ष उसकी सबसे अनमोल धरोहर हैं। रुद्राक्ष जैसे वृक्षों का रोपण पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय परिवार ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनके संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। साथ ही समाज से अपील की गई कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के किसी विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल कर उसे एक विशाल वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखे। यही प्रकृति के प्रति सच्ची श्रद्धा और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।