दरगाहा आला हजरत गली सौदागरान स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर की विवादित संपत्ति सील, प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, पुलिस फोर्स के साथ लगा ताला
- Advertisement -
दरगाहा आला हजरत गली सौदागरान स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर की विवादित संपत्ति सील, प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, पुलिस फोर्स के साथ लगा ताला
*रिपोर्ट/आसिफ अली *
- Advertisement -
रिसीवर बनी कोतवाली पुलिस: मौलाना तौकीर रजा के घर के सामने वाली बैठक और बगल की जगह सील, 23 जून को सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश, 2 जुलाई को बरेली न्यायालय में सुनवाई
बरेली कोतवाली क्षेत्र में दरगाह आला हजरत गली सौदागरान स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर की विवादित संपत्ति पर प्रशासन की टीम ने सीलिंग की कार्रवाई की। मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम ने न्यायालय में विचाराधीन संपत्ति पर नोटिस चस्पा कर उसे सील कर दिया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर भारी पुलिस बल के साथ अधिकारी मौजूद रहे। स्थानीय कोतवाली पुलिस को रिसीवर नियुक्त किया गया है ताकि संपत्ति सुरक्षित रखी जा सके।
जानकारी के अनुसार कार्रवाई मौलाना तौकीर रजा के घर के सामने वाली बैठक और उसके बगल वाली जगह पर की गई है। प्रशासनिक टीम पुलिस फोर्स के साथ पहुंची और दोनों स्थानों पर ताला लगाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीलिंग की कार्रवाई केवल विवादित संपत्ति तक सीमित रखी गई है।
रिसीवर की तैनाती और प्रशासन पर दबाव
धर्म प्रकाश रस्तोगी ने बताया कि जब मंदिर की जमीन को मुस्लिम पक्ष के लोगों – तौकीर रजा, मौलाना शहाबुद्दीन और शाजी हाशमी आदि को बेचा गया, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। 23 जून को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने संपत्ति सील करने का आदेश दिया था, लेकिन स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करने में सुस्त था। आज जब मुख्यमंत्री बरेली आए, तो विधायकों ने यह मामला उनके सामने रखा और सीएम की सख्ती के बाद ही यह प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी। वर्तमान में कोतवाली पुलिस को रिसीवर नियुक्त कर दिया गया है।
हिंदू पक्ष: मंदिर की जगह पूजा हो, व्यापार नहीं
इस मामले पर सुमित मेहरोत्रा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मंदिर की जगह को खरीदा और बेचा जाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि मंदिर की जगह पर पूजा होनी चाहिए। अगर मंदिर की ही जगह पर व्यापार होगा तो यह किसी के भी दिल को आहत करेगा। हिंदू पक्ष का आरोप है कि यह संपत्ति लक्ष्मी नारायण मंदिर की है और इस पर कब्जे का विवाद लंबे समय से चल रहा है। मामला वर्तमान में बरेली न्यायालय में विचाराधीन है।
मुस्लिम पक्ष: कागजात न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे, कानून का सम्मान करेंगे
मुस्लिम पक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि जिस संपत्ति को खरीदा गया था, उसके विक्रेता अब दिल्ली में बस गए हैं। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जमीन की खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर वह सभी कागजात शासन-प्रशासन और माननीय न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे। उनका कहना है कि मामला बरेली न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित है। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हम पूरी तरह कानून के साथ हैं और माननीय न्यायालय जो भी फैसला देगा, उसे स्वीकार करेंगे।
प्रशासन: कानून के दायरे में कार्रवाई, शांति व्यवस्था प्राथमिकता
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहते हुए की गई है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के निर्णय के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।