बरेली उपभोक्ता फोरम का बड़ा झटका’, पिता ने बेटे के लोन पर ठोका दावा- 4.70 लाख की मांग खारिज, कंपनी को मिली राहत*

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बरेली उपभोक्ता फोरम का बड़ा झटका’, पिता ने बेटे के लोन पर ठोका दावा- 4.70 लाख की मांग खारिज, कंपनी को मिली राहत*

रिपोर्ट/आसिफ अली

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*’किराए पर ऑटो चलाना पड़ा महंगा’, आयोग बोला ‘व्यापार के लिए खरीदी गाड़ी पर कानून नहीं देगा सुरक्षा’- नोटिस देकर हुई थी नीलामी*

*बरेली, बुधवार जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बरेली ने एक अहम फैसले में दो टूक कहा है कि कमाई के लिए खरीदी गई गाड़ी पर उपभोक्ता संरक्षण कानून का कवच नहीं मिलेगा। आयोग ने रामायण ऑटो फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज करते हुए 4.70 लाख रुपये के मुआवजे की मांग ठुकरा दी।

*’बेटे के नाम पर लिया था लोन, पिता पहुंचे कोर्ट’*
भिण्डोलिया के रहने वाले निसार ने आयोग में अर्जी दी थी। उनका दावा था कि उम्र अधिक होने की वजह से फाइनेंस कंपनी ने उन्हें लोन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने बेटे मो. साजिद के नाम से दो ऑटो फाइनेंस कराए। निसार ने दो ड्राइवर रखकर ऑटो सड़क पर उतारे और शुरू में किस्तें भी जमा कीं। बीमार पड़ने के बाद किस्तें बंद हो गईं। आरोप था कि कंपनी ने बिना सही प्रक्रिया अपनाए दोनों ऑटो नीलाम कर दिए। निसार ने 4 लाख रुपये वाहन कीमत और 70 हजार रुपये मानसिक कष्ट के मांगे थे।

*’निसार हमारा उपभोक्ता ही नहीं’ : फाइनेंस कंपनी*
कंपनी के अधिवक्ता सिद्धांत गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि लोन एग्रीमेंट सिर्फ मो. साजिद के साथ हुआ था। निसार और कंपनी के बीच कोई सीधा अनुबंध नहीं है, इसलिए वे उपभोक्ता नहीं माने जा सकते। कंपनी ने कहा कि कई महीनों तक EMI नहीं आई और दिए गए चेक भी बाउंस हो गए। चेक बाउंस का मामला धारा-138 NI एक्ट में पहले से विचाराधीन है। कंपनी ने नीलामी से पहले नियमानुसार नोटिस भेजा था।

*’ड्राइवर रखे तो निजी इस्तेमाल कैसे’ : आयोग का फैसला*
आयोग के अध्यक्ष दीपक कुमार त्रिपाठी और सदस्य दिनेश कुमार गुप्ता की पीठ ने माना कि पहला, लोन दस्तावेज में निसार का नाम नहीं है। ऐसे में वे मुआवजे के हकदार नहीं हैं। दूसरा, शिकायतकर्ता ने खुद कबूला कि ऑटो चलाने के लिए दो ड्राइवर रखे गए थे। इससे साफ है कि वाहन का इस्तेमाल व्यवसायिक था। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के तहत व्यवसायिक उद्देश्य से खरीदी गई वस्तु या सेवा पर राहत का प्रावधान नहीं है।

आयोग ने माना कि लोन डिफॉल्ट साबित है और नीलामी की कार्रवाई नियमानुसार हुई। इन आधारों पर शिकायत को निराधार बताकर खारिज कर दिया गया। आदेश में कहा गया कि दोनों पक्ष अपना-अपना वाद व्यय खुद वहन करेंगे।