असजद मियाँ की खुसूसी दुआ के साथ 8वें उर्स-ए-ताजुशशरिया का समापन

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असजद मियाँ की खुसूसी दुआ के साथ 8वें उर्स-ए-ताजुशशरिया का समापन

रिपोर्ट/आसिफ अली

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*मुफ्ती शाहजाद आलम बोले- बच्चियों को तालीम दें, मोबाइल से रखें दूर; लाखों जायरीन ऑनलाइन भी जुड़े*

*बरेली, 25 अप्रैल सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के मजहबी रहनुमा हुज़ूर ताजुशशरिया मुफ्ती मोहम्मद अख्तर रज़ा खान अज़हरी मियां का दो रोज़ा 8वां उर्स-ए-ताजुशशरिया सज्जादानशीन काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रज़ा खान कादरी असजद मियां की खुसूसी दुआ के साथ मुकम्मल हो गया। शाम 07 बजकर 14 मिनट पर हुजूर ताजुशशरिया के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई, जिसमें देश-दुनिया में अमन-ओ-अमान और फिलस्तीन के मुसलमानों की हिफाजत के लिए दुआ हुई।

*‘बच्चों को दीनी-दुनियावी तालीम दें, बच्चियों को मोबाइल से बचाएं’*
उर्स स्थल मदरसा जामियातुर रज़ा में बाद नमाज़-ए-जोहर कारी रिज़वान ने कुरान की तिलावत से प्रोग्राम का आगाज़ किया। निजामत मौलाना गुलज़ार रज़वी ने की। तकरीर करते हुए *मुफ्ती शाहजाद आलम मिस्बाही* ने कहा कि ताजुशशरिया ने पूरी जिंदगी मज़हब व मसलक के लिए वक्फ कर दी। मुसलमानों को उनके नक्शे कदम पर चलते हुए बच्चों को दीनी व दुनियावी तालीम जरूर दिलानी चाहिए। चाहे आधा पेट खाएं लेकिन तालीम पर खास ध्यान दें। *बच्चियों को तालीम जरूर दें और मोबाइल से दूर रखें* ताकि उनका मुस्तकबिल बेहतर बने।

मुफ्ती जाहिद रज़ा ने कहा कि हुज़ूर ताजुशशरिया आशिक-ए-रसूल और गुलाम-ए-अहलेबैत थे। आप का हर काम शरीयत-ए-इस्लाम के मुताबिक था, इसलिए आपको ताजुशशरिया कहा जाता है। आपने अरबी, उर्दू, अंग्रेजी में सौ से ज्यादा किताबें लिखीं और लाखों फतवे जारी किए। काल्पी के सज्जादानशीन सैय्यद गियास मियां ने कहा कि कल भी बरेली शरीफ मरकज़ था और कयामत तक मरकज़ रहेगा। हम सिर्फ काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रज़ा को अपना रहबर मानते हैं।

*देश-विदेश से पहुंचे उलेमा, ऑनलाइन भी जुड़े लाखों जायरीन*
घोसी शरीफ से मुहद्दिस-ए-कबीर जिया उल मुस्तफा, मुफ्ती आशिक हुसैन कश्मीरी, बगदाद से शेख उमर अल बगदादी, साउथ अफ्रीका के अफ्ताब कासिम, बिलग्राम के सोहिल मियां, अनस मियां, फैजाबाद से मौलाना अब्दुल मुस्तफा रुदौली समेत तमाम उलेमा ने शिरकत की। फातिहा फैजू नबी और कारी शरफुद्दीन ने पढ़ी, शिजरा शरीफ मुहद्दिस-ए-कबीर ने पढ़ा।

जमात रज़ा के आईटी सेल प्रभारी अतीक अहमद ने बताया कि जो जायरीन बरेली नहीं पहुंच पाए, वे ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। 24 व 25 अप्रैल को मिक्सर और यू-ट्यूब पर लाइव प्रसारण किया गया, जिसे विश्व भर में लाखों लोगों ने देखा। दरगाह आला हज़रत, शाहदाना वाली, नसीर मियां समेत शहर-देहात की सभी मस्जिदों, खानकाहों, घरों-दुकानों में उर्स मनाया गया।

उर्स प्रभारी सलमान मियाँ और राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियाँ की निगरानी में जमात रज़ा-ए-मुस्तफा की बानखाना, फतेहगंज, बहेड़ी, शाही, करगैना समेत तमाम ब्रांचों के वॉलिंटियरों ने लंगर, ठंडा पानी, चाय-शरबत और ट्रैफिक व्यवस्था में सहयोग दिया।

सुबह 07:10 बजे मुफस्सिर-ए-आज़म हिंद जिलानी मियां के कुल की रस्म अदा हुई। दिन भर दरगाह आला हज़रत और दरगाह ताजुशशरिया पर हाजरी का सिलसिला चलता रहा। असर-मगरिब की नमाज़ लाखों लोगों ने जामियातुर रज़ा में अदा की। असजद मियां की दुआ के साथ दो रोज़ा उर्स का समापन हो गया।

*देश-विदेश के जायरीन आये साउदी अरब, दुबई, तुर्की, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, मॉरीशस, नेपाल, बांग्लादेश, के अलावा उतर प्रदेश, झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, पंजाब ,राजस्थान, उत्तराखंड आदि लोग शामिल हुए ।