बरेली में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम: फीस वृद्धि 5% तक सीमित, ड्रेस-किताब के लिए दुकान तय नहीं कर सकेंगे

0 20

- Advertisement -

बरेली में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम: फीस वृद्धि 5% तक सीमित, ड्रेस-किताब के लिए दुकान तय नहीं कर सकेंगे

रिपोर्ट /आसिफ अली

- Advertisement -

*नियम तोड़ा तो 5 लाख तक जुर्माना, मान्यता भी जाएगी; DM अविनाश सिंह की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति का बड़ा फैसला*

*बरेली, बरेली के अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। जिला शुल्क नियामक समिति ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को 5 फीसदी तक सीमित कर दिया है। अब स्कूल प्रबंधन मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। साथ ही किसी खास दुकान से ड्रेस, किताबें, जूते-मोजे खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे। नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई होगी।

*पहली गलती पर 1 लाख, तीसरी बार मान्यता रद्द*
जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में साफ निर्देश दिए गए कि पहली बार नियमों का उल्लंघन करने पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना और छात्र से ली गई अतिरिक्त फीस वापस करनी होगी। दूसरी बार उल्लंघन पर 5 लाख रुपये का अर्थदंड और फीस वापसी होगी। तीसरी बार गलती दोहराने पर विकास निधि की अनुमति वापस लेने के साथ मान्यता रद्द करने की संस्तुति की जाएगी।

*NCERT किताबों को प्राथमिकता, 5 साल तक ड्रेस नहीं बदलेगी*
समिति ने स्कूलों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की किताबों को प्राथमिकता देने को कहा है। फीस का पूरा विवरण पारदर्शी रखना होगा। विद्यालय 5 शैक्षणिक वर्षों के भीतर ड्रेस में बदलाव नहीं कर सकेंगे। ड्रेस बदलने के लिए जनपदीय शुल्क नियामक समिति का अनुमोदन जरूरी होगा।

*60 दिन पहले वेबसाइट पर डालनी होगी फीस*
सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को प्रत्येक शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले आगामी वर्ष के शुल्क का विवरण समिति को देना होगा। प्रवेश शुरू होने से 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट पर फीस का पूरा विवरण अपलोड करना होगा। यह जानकारी स्कूल के सूचना पट्ट पर भी लगानी होगी और एक प्रति जिला विद्यालय निरीक्षक को देनी होगी। फीस का भुगतान मासिक, त्रैमासिक या अर्ध-वार्षिक किस्तों में किया जा सकेगा।

*अभिभावकों को सीधी राहत*
समिति ने साफ किया है कि कोई भी विद्यालय कैपिटेशन शुल्क नहीं लेगा। हर शुल्क की रसीद देना अनिवार्य होगा। छात्रों को किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे किसी विशिष्ट दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन ने कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए मदद की जाएगी।