सांसद नीरज मौर्य के लोकसभा प्रश्न से उजागर हुई सरकारी दावों की पोल

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सांसद नीरज मौर्य के लोकसभा प्रश्न से उजागर हुई सरकारी दावों की पोल

रिपोर्ट/आसिफ अली

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आंवला/बरेली। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) को लेकर आंवला संसदीय क्षेत्र में जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक सामने आई है। समाजवादी पार्टी के आंवला-बरेली सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में केंद्र सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि यह योजना क्षेत्र में लगभग कागजों तक ही सीमित रह गई है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की राज्य मंत्री शोभा करांदलाजे द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार बीते तीन वर्षों में आंवला संसदीय क्षेत्र में पीएमईजीपी के तहत बेहद नगण्य प्रगति हुई है। वर्ष 2022-23 में मात्र 6.04 लाख रुपये की सब्सिडी और 17.76 लाख रुपये का ऋण दिखाया गया, जबकि 2023-24 और 2024-25 में एक भी ऋण या सब्सिडी स्वीकृत नहीं की गई।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि तीन वर्षों में आए 26 आवेदनों में से केवल 2 आवेदकों को ही ऋण स्वीकृत किया गया। इससे साफ है कि बेरोजगारी दूर करने और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा देने के सरकारी दावे हकीकत से कोसों दूर हैं।

सांसद नीरज मौर्य ने अपने सवाल में यह भी उठाया था कि क्या युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को योजना का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर सरकार ने माना कि बैंकों की ऋण स्वीकृति में ढिलाई, दस्तावेजी जटिलताएं और प्रक्रिया की धीमी गति बड़ी बाधा बनी हुई हैं। हालांकि आंवला जैसे क्षेत्रों में शून्य प्रगति पर सरकार कोई ठोस कारण या समाधान नहीं बता सकी।

सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि आंवला क्षेत्र के युवाओं और छोटे कारोबारियों को योजनाओं से वंचित रखा जाना सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करता है। उन्होंने कहा, “मैं जनता से जुड़े हर सवाल पर सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध हूं। रोजगार सृजन तभी संभव है जब योजनाएं वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचें।”