समाज सेवा की मिसाल बना इसबा, सरकारी डॉक्टरों पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह भ्रामक
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समाज सेवा की मिसाल बना इसबा, सरकारी डॉक्टरों पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह भ्रामक
आपदा राहत से लेकर जरूरतमंद परिवारों की जिम्मेदारी तक, नियमों के तहत कार्य कर रही है संस्था
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बरेली।इंटेलेक्चुअल सोशल वेलफेयर एसोसिएशन (इसबा) बीते कुछ वर्षों से समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहकर एक अलग पहचान बना चुका है।
आपदा राहत, आर्थिक सहायता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किए गए इसके कार्यों की समाज में व्यापक सराहना हो रही है।
इसके बावजूद हाल के दिनों में संस्था और इससे जुड़े कुछ सम्मानित सरकारी डॉक्टरों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को जानकार पूरी तरह निराधार और भ्रामक बता रहे हैं।
इसबा ने यह साबित किया है कि समाज सेवा किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह मानवता के प्रति जिम्मेदारी का भाव है।
संस्था ने हर बार जरूरत के समय आगे बढ़कर पीड़ितों की मदद की है, चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो या किसी परिवार पर अचानक आई विपत्ति।
पीलीभीत बाढ़ राहत में निभाई अहम भूमिका
कुछ समय पूर्व पीलीभीत जनपद में आई भीषण बाढ़ के दौरान हजारों परिवार प्रभावित हुए थे।
ऐसे कठिन समय में इसबा ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए लगभग 600 जरूरतमंद परिवारों को राहत किट उपलब्ध कराईं।
इन किटों में खाद्य सामग्री, आवश्यक वस्तुएं और दैनिक उपयोग का सामान शामिल था, जिससे बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत मिल सकी।
स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने भी संस्था के इस प्रयास की खुले तौर पर सराहना की थी।
अनाथ हुए बच्चों की जिम्मेदारी उठाकर पेश की मिसाल बरेली के ठिरिया क्षेत्र में एक कबाब कारोबारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसका परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था।
इस दुखद घटना के बाद इसबा ने न सिर्फ परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि मृतक के बच्चों की शिक्षा और परवरिश की पूरी जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर ली। यह कदम संस्था की सामाजिक प्रतिबद्धता और संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
‘जकात’ के माध्यम से नियमित सहायता
इसबा के अंतर्गत ‘जकात’ नाम से एक विशेष सामाजिक गठन संचालित किया जा रहा है, जिसके जरिए गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद परिवारों को नियमित रूप से आर्थिक और आवश्यक सहायता दी जाती है।
इसका उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचाना है। संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार, सहायता वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है और जरूरतमंदों की पहचान पूरी जांच-पड़ताल के बाद की जाती है।
भ्रामक आरोपों पर संस्था का पक्ष
हाल के दिनों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा यह आरोप लगाए गए कि इसबा किसी एक विशेष समुदाय तक सीमित संस्था है और इससे सरकारी डॉक्टर जुड़े हुए हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।
इस संबंध में संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि ये आरोप पूरी तरह झूठे और भ्रम फैलाने वाले हैं।
इसबा एक सर्वसमाज की संस्था है, जिसमें विभिन्न वर्गों, समुदायों और पेशों से जुड़े लोग सदस्य के रूप में शामिल हैं।
संस्था से जुड़े प्रमुख सदस्यों में डॉ. अतुल अग्रवाल (एनेस्थीसिया विशेषज्ञ), डॉ. रामवीर सिंह सहित कई सम्मानित चिकित्सक और समाजसेवी शामिल हैं।
नियमों के तहत पूरी तरह वैध है सहभागिता
जानकारों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग या किसी भी सरकारी विभाग में कार्यरत अधिकारी अथवा डॉक्टर किसी गैर-सरकारी संगठन से जुड़ सकते हैं, बशर्ते इसके लिए विभाग से पूर्व अनुमति ली गई हो।
साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होता है कि इससे उनके सरकारी कर्तव्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और हितों का टकराव (Conflict of Interest) न हो।
नियमों के तहत यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध मानी जाती है।
छवि खराब करने की कोशिश करार
इसबा से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि संस्था पूरी पारदर्शिता, नियमों और कानून के दायरे में रहकर समाज सेवा का कार्य कर रही है।
लगातार लगाए जा रहे आरोप केवल संस्था की बढ़ती लोकप्रियता से विचलित होकर उसकी छवि धूमिल करने का प्रयास हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
संस्था का स्पष्ट कहना है कि समाज सेवा ही इसका एकमात्र उद्देश्य है और भविष्य में भी इसबा जरूरतमंदों के लिए इसी तरह निस्वार्थ भाव से कार्य करता रहेगा।
रिपोर्ट /आसिफ अली