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महिला की शिकायत दबाना बहेड़ी थाने के सिपाही को पड़ा भारी, SSP ने किया सस्पेंड
पांच दिन तक शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप, न्याय की गुहार लेकर एसएसपी कार्यालय पहुंची महिला; आरक्षी अंकुश खन्ना पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और कर्तव्य में लापरवाही के आरोप, विभागीय जांच के आदेश
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बरेली। जनपद में पुलिसकर्मियों की लापरवाही और अनुशासनहीनता को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने सख्त रुख अपनाया है। थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने और जांचकर्ता सिपाही के कथित गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार का मामला सामने आने के बाद बहेड़ी थाने में तैनात आरक्षी अंकुश खन्ना पर गाज गिर गई। एसएसपी ने आरक्षी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
मामला एक महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिसने 23 अक्टूबर 2026 को थाना बहेड़ी में शिकायती प्रार्थना पत्र दिया था। शिकायत थाने के जनसुनवाई रजिस्टर में दर्ज होने के बावजूद महिला का आरोप है कि पांच दिन तक उसकी समस्या के समाधान के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब थाने से न्याय मिलने की उम्मीद पूरी नहीं हुई तो महिला 28 अक्टूबर को अपनी फरियाद लेकर सीधे एसएसपी कार्यालय पहुंच गई। यहां उसने अधिकारियों के सामने पूरे मामले को रखा, जिसके बाद पुलिस महकमे में कार्रवाई हुई।
थाने में शिकायत दर्ज, फिर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, महिला ने 23 अक्टूबर को बहेड़ी थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को जनसुनवाई रजिस्टर में दर्ज भी किया गया, लेकिन आरोप है कि इसके बाद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद सुनवाई नहीं होने से परेशान महिला को आखिरकार वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय का रुख करना पड़ा।
यह मामला पुलिस की जनसुनवाई व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। जब कोई फरियादी अपनी समस्या लेकर थाने पहुंचता है तो उससे समय पर कार्रवाई और निष्पक्ष सुनवाई की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में शिकायत दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप गंभीर माना जा रहा है।
जांचकर्ता सिपाही के रवैये पर उठे सवाल
महिला ने अपनी शिकायत में मामले के जांचकर्ता आरक्षी अंकुश खन्ना पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने और पदीय दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करने के आरोप लगाए। शिकायत के अनुसार, महिला को मामले में अपेक्षित सहयोग और कार्रवाई नहीं मिली।
एसएसपी कार्यालय तक पहुंचे इस प्रकरण को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया। प्रारंभिक स्तर पर सामने आए तथ्यों के आधार पर आरक्षी के आचरण और कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, जिसके बाद उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
प्रथम दृष्टया लापरवाही मिलने पर तत्काल निलंबन
बहेड़ी थाने में तैनात आरक्षी संख्या 3440 अंकुश खन्ना के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और कदाचार के आरोपों को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए। इसके साथ ही मामले की विस्तृत विभागीय जांच कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि महिला की शिकायत पर कार्रवाई में देरी क्यों हुई, संबंधित आरक्षी ने अपने दायित्वों का निर्वहन किस तरह किया और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
फरियादियों की शिकायतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने का संदेश
इस कार्रवाई को पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर अंकुश लगाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। थाने आम नागरिकों की शिकायत सुनने और उन्हें न्याय दिलाने की प्रक्रिया की पहली कड़ी होते हैं। ऐसे में शिकायत दर्ज होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने की शिकायत पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती है।
एसएसपी की ओर से की गई कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि ड्यूटी में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। हालांकि, आरक्षी अंकुश खन्ना के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
फिलहाल बहेड़ी थाने के इस मामले में विभागीय जांच पर नजर रहेगी। जांच में यह भी अहम होगा कि महिला की मूल शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और जिम्मेदारी तय होने के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।