बरेली कोर्ट से फरार 25 हजार का इनामी सचिन मुठभेड़ में गिरफ्तार, बदमाश के पैर में लगी गोली
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बरेली कोर्ट से फरार 25 हजार का इनामी सचिन मुठभेड़ में गिरफ्तार, बदमाश के पैर में लगी गोली
कोतवाली पुलिस ने बुधवार तड़के घेराबंदी कर दबोचा, जवाबी फायरिंग में हेड कांस्टेबल रवाब मियां भी घायल; अवैध तमंचा, दो जिंदा और दो खोखा कारतूस बरामद
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बरेली। कोर्ट परिसर से पुलिस अभिरक्षा में चकमा देकर फरार हुए 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश सचिन सिंह ठाकुर को बरेली पुलिस ने बुधवार तड़के मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। कोतवाली पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुई जवाबी फायरिंग में सचिन के दाहिने पैर में गोली लगी, जबकि एक गोली हेड कांस्टेबल रवाब मियां के बाजू को छूती हुई निकल गई। मुठभेड़ में घायल बदमाश और पुलिसकर्मी को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 315 बोर का एक अवैध तमंचा, दो जिंदा कारतूस और दो खोखा कारतूस बरामद किए हैं।
कोर्ट परिसर से फरार होने के बाद से ही पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी थीं। मामले में पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आने पर एसएसपी अनुराग आर्य ने आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। फरार आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। आखिरकार बुधवार तड़के पुलिस ने उसे मुठभेड़ के बाद पकड़ लिया।
21 अक्टूबर को पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर भागा था सचिन
सुभाषनगर थाना क्षेत्र के बंशीनगला ठेरा की टाल निवासी सचिन सिंह ठाकुर 21 अक्टूबर को पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था। जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 1:45 बजे जिला कारागार से बंदियों को न्यायालय में पेशी के लिए लाया गया था। सेशन हवालात से बंदियों को संबंधित अदालतों में पेशी के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान एडीजे कोर्ट में पेशी के वक्त सचिन सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया।
हैरानी की बात यह रही कि आरोपी के फरार होने की जानकारी तत्काल अधिकारियों तक नहीं पहुंची। अगले दिन 22 अक्टूबर को न्यायालय चौकी प्रभारी एसआई सरोज कुमार ने हवालात का निरीक्षण किया तो बंदियों की संख्या में अंतर सामने आया। पता चला कि पेशी के लिए भेजे गए छह बंदियों में से केवल पांच ही वापस लौटे थे। इसके बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई और फरार बंदी की तलाश शुरू हुई।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली लापरवाही की पोल
मामले की जांच के दौरान न्यायालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए तो पुलिसकर्मियों की ड्यूटी में गंभीर लापरवाही सामने आई। फुटेज में हेड कांस्टेबल कुलवंत सिंह एक बंदी को लेकर लौटते दिखाई दिए, जबकि एसआई बिजेंद्र सिंह और हेड कांस्टेबल राजेंद्र सिंह चार बंदियों के साथ वापस आते नजर आए। इस दौरान सचिन सिंह ठाकुर उनके साथ नहीं था।
इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने जनरल डायरी (जीडी) में सभी छह बंदियों की वापसी दर्ज कर दी थी। रिकॉर्ड में दोपहर 2:12 बजे सभी बंदियों की वापसी दर्ज होने की बात सामने आई, जबकि सचिन पहले ही फरार हो चुका था। इस गंभीर चूक ने न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।
एसएसपी ने आठ पुलिसकर्मियों को किया था निलंबित
घटना सामने आने के बाद एसएसपी अनुराग आर्य ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही फरार बंदी सचिन सिंह ठाकुर समेत संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया।
मामले में एसआई बिजेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल राजेंद्र सिंह, कुलवंत सिंह, हवालात प्रभारी सुधीर कुमार, सोमदास, धर्मेंद्र, इंद्रजीत और आदेश के नाम शामिल किए गए। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 261 और 262 के तहत कार्रवाई की गई।
चार पुलिस टीमें तलाश में थीं, 25 हजार का रखा गया था इनाम
फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सीओ सिटी आशुतोष शिवम के नेतृत्व में एसओजी, सर्विलांस, कोतवाली और सुभाषनगर पुलिस की चार टीमें लगाई गई थीं। पुलिस आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
बुधवार तड़के कोतवाली पुलिस की कार्रवाई के दौरान सचिन से मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसके दाहिने पैर में गोली लगी। इस दौरान हेड कांस्टेबल रवाब मियां भी गोली लगने से घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
फरारी से गिरफ्तारी तक पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
न्यायालय परिसर से बंदी का पुलिस अभिरक्षा में फरार होना और फिर जीडी में उसकी वापसी दर्ज कर देना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला रहा। घटना के बाद निलंबन और मुकदमे की कार्रवाई हुई, वहीं आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगानी पड़ीं। अब मुठभेड़ के बाद सचिन की गिरफ्तारी से पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।
पुलिस ने आरोपी के पास से अवैध तमंचा और कारतूस बरामद किए हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।