पीलीभीत में जिला उद्योग केंद्र का वरिष्ठ सहायक 5 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण टीम ने बिछाया जाल
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पीलीभीत में जिला उद्योग केंद्र का वरिष्ठ सहायक 5 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, भ्रष्टाचार निवारण टीम ने बिछाया जाल
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत वाटर प्लांट के लिए लोन स्वीकृत कराने के बदले मांगी थी रकम, कार्यालय में ही ट्रैप लगाकर पकड़ा; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
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बरेली/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बरेली मंडल टीम ने पीलीभीत में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने जिला उद्योग केंद्र में तैनात वरिष्ठ सहायक हिमांशु कुमार को पांच हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कर्मचारी ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत वाटर प्लांट स्थापित करने के लिए ऋण स्वीकृत कराने के बदले शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की और आरोपी को उसके कार्यालय में ही पकड़ लिया।
लोन स्वीकृत कराने के बदले मांगे थे पांच हजार रुपये
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार पुत्र कंचनलाल, निवासी बहादुरपुर हुक्मी, थाना बरखेड़ा, जनपद पीलीभीत ने संगठन से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत वाटर प्लांट लगाने के लिए ऋण स्वीकृत कराने के एवज में जिला उद्योग केंद्र में तैनात वरिष्ठ सहायक हिमांशु कुमार उनसे पांच हजार रुपये की मांग कर रहे थे।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बरेली मंडल टीम ने मामले में आवश्यक कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद नियमानुसार ट्रैप की तैयारी की गई, ताकि कथित रिश्वत लेते समय आरोपी को पकड़ा जा सके।
दोपहर 12:20 बजे कार्यालय में हुई कार्रवाई
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को ट्रैप टीम प्रभारी निरीक्षक इम्तियाज वारसी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम पीलीभीत स्थित जिला उद्योग केंद्र पहुंची। यहां दोपहर करीब 12:20 बजे वरिष्ठ सहायक हिमांशु कुमार को कथित तौर पर पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।
कार्रवाई के दौरान टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की। सरकारी कार्यालय में तैनात कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद विभागीय स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
सुनगढ़ी क्षेत्र का निवासी है आरोपी
गिरफ्तार वरिष्ठ सहायक की पहचान हिमांशु कुमार पुत्र लालाराम के रूप में हुई है। वह पीलीभीत जनपद के सुनगढ़ी थाना क्षेत्र स्थित तिरुपति गोल्डन पार्क के निवासी बताए गए हैं। हिमांशु कुमार जिला उद्योग केंद्र, पीलीभीत में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात थे।
आरोप है कि उन्होंने सरकारी योजना के तहत ऋण स्वीकृत कराने की प्रक्रिया में शिकायतकर्ता से पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे की तैयारी
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पीलीभीत कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद मामले में आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। आगे की जांच संबंधित अधिकारियों की ओर से की जाएगी।
इस कार्रवाई को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायतों के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का उद्देश्य पात्र लोगों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया में कथित रिश्वत मांगने का मामला सामने आने से सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा भी चर्चा में है।
रिश्वत मांगे तो इन नंबरों पर करें शिकायत
भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बरेली मंडल ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी कार्य को करने के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी शिकायत संगठन से की जा सकती है।
शिकायत के लिए जारी संपर्क नंबर इस प्रकार हैं:
- पुलिस उपाधीक्षक, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बरेली: 9454405475
- प्रभारी निरीक्षक, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बरेली इकाई: 9454401653
संगठन का कहना है कि रिश्वत मांगने से संबंधित शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। पीलीभीत में की गई इस कार्रवाई के जरिए सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख का संदेश दिया गया है। मामले में आरोपी की दोषसिद्धि का निर्णय जांच और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।