नवोदय अस्पताल की आग ने खोली भवन सुरक्षा की पोल, BDA ने सील की अवैध चौथी मंजिल
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नवोदय अस्पताल की आग ने खोली भवन सुरक्षा की पोल, BDA ने सील की अवैध चौथी मंजिल
तीन मंजिल का था स्वीकृत नक्शा, बिना अनुमति खड़ी की जा रही थी चौथी मंजिल; अब शहर के दूसरे अस्पताल भी जांच के घेरे में
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बरेली। मिनी बाईपास स्थित नवोदय अस्पताल में लगी आग के बाद भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आग की घटना के बाद बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) की जांच में अस्पताल की इमारत में स्वीकृत मानचित्र से अलग निर्माण सामने आया। इसके बाद प्राधिकरण ने अस्पताल की चौथी मंजिल को सील कर दिया है।
मामला सामने आने के बाद BDA ने अब शहर में संचालित अन्य अस्पतालों की पुरानी फाइलों की भी दोबारा जांच शुरू कर दी है। यह देखा जा रहा है कि अस्पताल भवनों का निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुसार हुआ है या नहीं। साथ ही बेसमेंट, पार्किंग, अतिरिक्त मंजिल, अग्निशमन इंतजाम और भवन के उपयोग से जुड़े जरूरी प्रमाणपत्रों की स्थिति भी खंगाली जा सकती है।
तीन मंजिल का नक्शा पास, चौथी मंजिल का शुरू हुआ निर्माण
जानकारी के अनुसार नवोदय अस्पताल का भवन करीब दो वर्ष पहले तैयार हुआ था। अस्पताल के लिए तीन मंजिल का मानचित्र स्वीकृत कराया गया था। इसके बाद भवन में अतिरिक्त मंजिल का निर्माण शुरू कर दिया गया।
रक्षाबंधन के दौरान अस्पताल की चौथी मंजिल पर आग लगने की घटना के बाद निर्माण को लेकर सवाल उठे। मामले की जानकारी मिलने पर BDA उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय के निर्देश पर जांच टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान स्वीकृत नक्शे से अतिरिक्त निर्माण मिलने के बाद प्राधिकरण ने चौथी मंजिल को सील कर दिया।
निगरानी के बावजूद कैसे खड़ी हो गई अतिरिक्त मंजिल?
नवोदय अस्पताल का मामला सामने आने के बाद BDA की प्रवर्तन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि अतिरिक्त निर्माण कब शुरू हुआ और उस दौरान संबंधित क्षेत्र की निगरानी की जिम्मेदारी किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की थी।
क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी के लिए जिम्मेदार सुपरवाइजर, अवर अभियंता और सहायक अभियंता की भूमिका की भी जांच की जा सकती है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही अथवा नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
पुराने अस्पतालों की फाइलें फिर खुलेंगी
नवोदय अस्पताल की कार्रवाई के बाद BDA ने शहर के अन्य अस्पतालों से जुड़ी पुरानी फाइलों पर भी नजर डालनी शुरू कर दी है। पूर्व में जिन अस्पतालों को भवन नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किए गए थे, उनकी वर्तमान स्थिति का भी परीक्षण किया जाएगा।
प्राधिकरण यह पता लगाने में जुटा है कि जिन अस्पतालों ने कार्रवाई से बचने के लिए समय या मोहलत मांगी थी, उन्होंने बाद में अपने भवन का मानचित्र नियमित कराया या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं नियमों के विपरीत निर्माण के बावजूद अस्पतालों का संचालन तो नहीं हो रहा है।
‘आवश्यक चिकित्सा सेवा’ के नाम पर कार्रवाई में लगी थी अड़चन
शहर में अस्पतालों पर भवन संबंधी कार्रवाई के दौरान कई बार चिकित्सा सेवाओं का हवाला देकर समय मांगे जाने की बात सामने आती रही है। ऐसे मामलों में सीलिंग या ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती थी।
अब BDA पुराने मामलों की समीक्षा कर यह जानने का प्रयास कर रहा है कि जिन अस्पतालों को पहले राहत या समय दिया गया था, उन्होंने उस अवधि में भवन संबंधी कमियां दूर कीं या नहीं।
बेसमेंट, पार्किंग और अतिरिक्त मंजिलों पर भी नजर
BDA की जांच का दायरा केवल अतिरिक्त मंजिलों तक सीमित नहीं रहने वाला है। रामपुर गार्डन, राजेंद्रनगर, डीडीपुरम, स्टेडियम रोड, पीलीभीत बाईपास और मिनी बाईपास जैसे इलाकों में संचालित अस्पतालों के भवनों की जांच की जा सकती है।
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि अस्पतालों में बेसमेंट और पार्किंग का इस्तेमाल स्वीकृत नियमों के अनुसार हो रहा है या नहीं। इसके अलावा अग्निशमन व्यवस्था, भवन की मंजिलों, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और अन्य आवश्यक अनुमतियों की स्थिति भी जांच के दायरे में रहेगी।
अस्पताल भवनों के लिए मानचित्र और जरूरी NOC जरूरी
शहरी क्षेत्र में किसी भवन का निर्माण निर्धारित नियमों के तहत स्वीकृत मानचित्र के आधार पर किया जाना जरूरी है। अस्पताल जैसे संवेदनशील भवनों के लिए निर्माण और संचालन से पहले संबंधित विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना भी जरूरी होता है।
निर्माण पूरा होने के बाद भवन के उपयोग से पहले आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करना और संबंधित प्रमाणपत्र प्राप्त करना भी भवन सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इन नियमों का पालन नहीं होने पर भवन मालिक और संचालक कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
आग के बाद उठे सवालों ने बढ़ाई जांच की रफ्तार
नवोदय अस्पताल की चौथी मंजिल पर लगी आग ने सिर्फ अग्निसुरक्षा व्यवस्था पर ही सवाल नहीं खड़े किए, बल्कि भवन के निर्माण और स्वीकृत नक्शे के अनुपालन को लेकर भी गंभीर सवाल सामने ला दिए। अब BDA की जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि शहर के अस्पतालों में भवन नियमों का कितना पालन हो रहा है और किन मामलों में नियमों का उल्लंघन सामने आता है।
BDA उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में संचालित अस्पताल भवनों की नियमों के अनुरूप स्थिति की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।