बरेली में कुत्तों के झुंड ने छह साल की मासूम को नोचकर मार डाला, 100 मीटर तक घसीटते रहे खूंखार कुत्ते; बच्ची की हालत देख कांप उठे परिजन

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बरेली में कुत्तों के झुंड ने छह साल की मासूम को नोचकर मार डाला, 100 मीटर तक घसीटते रहे खूंखार कुत्ते; बच्ची की हालत देख कांप उठे परिजन

रिपोर्ट/आसिफ अली

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बरेली। सीबीगंज क्षेत्र के लटूरी गांव में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। यहां कुत्तों के झुंड ने छह साल की मासूम बच्ची पर हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्ची को बुरी तरह नोच डाला और करीब 100 मीटर तक घसीटते हुए खेतों की ओर ले गए।

बच्चों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह कुत्तों को भगाकर बच्ची को उनके चंगुल से मुक्त कराया। गंभीर रूप से घायल बच्ची को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। मासूम की हालत देखकर परिजनों की रूह कांप उठी। परिवार के मुताबिक बच्ची के शरीर पर कई गंभीर घाव थे। घटना ने इलाके में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खेलते समय कुत्तों के झुंड ने किया हमला
जानकारी के मुताबिक लटूरी गांव निवासी इसहाक खां की छह वर्षीय बेटी इनाया रविवार दोपहर करीब एक बजे गांव के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान अचानक कुत्तों का झुंड वहां पहुंच गया और बच्ची को घेरकर उस पर हमला कर दिया।

कुत्तों ने बच्ची के शरीर के कई हिस्सों को बुरी तरह नोच डाला। अचानक हुए हमले से वहां मौजूद अन्य बच्चे घबरा गए और चीखते हुए अपनी जान बचाकर भागे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े।

करीब 100 मीटर तक घसीटकर ले गए
ग्रामीणों के पहुंचने तक कुत्ते बच्ची को करीब 100 मीटर दूर खेतों की ओर घसीटकर ले जा चुके थे। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों की मदद से कुत्तों को वहां से भगाया और बच्ची को उनके चंगुल से छुड़ाया।
इसके बाद घटना की जानकारी परिवार को दी गई। परिजन तत्काल मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल इनाया को उपचार के लिए शहर के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

मासूम की हालत देखकर परिवार में मचा कोहराम
इनाया की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। बच्ची की मां आसिया का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के मुताबिक मासूम के शरीर पर कुत्तों के हमले के गंभीर निशान थे। जिस हालत में बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, उसे देखकर परिवार के लोगों का कलेजा कांप उठा।
इनाया अपने परिवार की तीन बेटियों में सबसे बड़ी थी। उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

दिव्यांग पिता चलाते हैं परचून की दुकान
मासूम के पिता इसहाक खां दिव्यांग हैं और गांव में परचून की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटी की अचानक हुई दर्दनाक मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है।
ग्रामीणों के मुताबिक घटना के बाद गांव में भी गम और आक्रोश का माहौल है। लोगों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए जिम्मेदार विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग की है।

पोस्टमार्टम कराने से परिवार ने किया इनकार
घटना की जानकारी मिलने के बाद थाना प्रभारी विनोद कुमार और हल्का दरोगा गांव पहुंचे और परिवार से बातचीत की। पुलिस ने बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराने की बात कही, लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए।

परिवार की ओर से कहा गया कि उनकी बेटी के शरीर पर पहले ही अनगिनत जख्म हैं और वे अब उसके शरीर पर किसी तरह की और प्रक्रिया नहीं चाहते। पुलिस के समझाने के बाद पंचनामा की कार्रवाई कराई गई। इसके बाद देर रात बच्ची के शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

पुलिस ने कहा- परिवार कार्रवाई और पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं सीओ टू नितिन कुमार के मुताबिक पुलिस को कुत्तों के हमले में बच्ची की मौत की सूचना मिली थी। पुलिस ने परिवार से पोस्टमार्टम और आवश्यक कार्रवाई के संबंध में बात की, लेकिन परिवार इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया गया।

तीन साल में तीन मासूमों की मौत से उठे सवाल
बरेली में आवारा कुत्तों के हमलों का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में कुत्तों के हमलों में तीन मासूमों की जान जा चुकी है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं।
आवारा कुत्तों और बंदरों के बढ़ते आतंक का मुद्दा हाल ही में 14 अगस्त को हुई नगर निगम की बोर्ड बैठक में भी उठा था। बैठक में समस्या से निपटने के लिए नई एजेंसी का चयन कर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। बताया गया था कि करीब 15 दिनों में एजेंसी का चयन किया जाएगा।
लेकिन बोर्ड बैठक के कुछ ही समय बाद लटूरी गांव में छह साल की मासूम की दर्दनाक मौत ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आखिर कब थमेगा आवारा कुत्तों का आतंक?
मासूम इनाया की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आबादी वाले इलाकों में घूम रहे आवारा कुत्तों से बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी। ग्रामीणों का कहना है कि कुत्तों के झुंड गांव और आसपास के इलाकों में लगातार घूमते रहते हैं और बच्चों पर हमले का खतरा बना रहता है।

इस दर्दनाक घटना ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन और नगर निकाय आवारा कुत्तों की समस्या पर ठोस और प्रभावी कदम उठाएं, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को अपनी मासूम संतान को इस तरह न खोना पड़े।