ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: बरेली में हत्या के दो मामलों में चार दोषियों को सजा, 1998 के केस में तीन को उम्रकैद
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ऑपरेशन कन्विक्शन का असर: बरेली में हत्या के दो मामलों में चार दोषियों को सजा, 1998 के केस में तीन को उम्रकैद
बरेली। उत्तर प्रदेश में अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत बरेली पुलिस की पैरवी का असर बुधवार को दो अलग-अलग मामलों में देखने को मिला। अदालतों ने हत्या से जुड़े मामलों में कुल चार दोषियों को सजा सुनाई। इनमें वर्ष 1998 के अपहरण और हत्या के मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिली, जबकि वर्ष 2019 में ऑटो चालक की मौत के मामले में दो आरोपियों को तीन-तीन साल के कारावास से दंडित किया गया।
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1998 के अपहरण-हत्या मामले में तीन को उम्रकैद
पहला मामला बहेड़ी थाना क्षेत्र से जुड़ा है और करीब 28 साल पुराना है। अभियोजन के मुताबिक, शिकायतकर्ता का भाई मोहनलाल बोरिंग का काम करता था। 25 अक्टूबर 1998 को बोरिंग के काम के सिलसिले में रामगोपाल, जयपाल और नन्हें उसे घर से अपने साथ लेकर गए थे। आरोप था कि इसके बाद मोहनलाल की हत्या कर दी गई और शव को छिपा दिया गया।
घटना के संबंध में थाना बहेड़ी में मुकदमा अपराध संख्या 717/1998 दर्ज किया गया था। मामले में धारा 364, 302, 34 आईपीसी के साथ एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में नौ गवाहों को पेश किया।
अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
12 अगस्त 2026 को बरेली की एससी/एसटी कोर्ट ने मामले में रामगोपाल पुत्र शोभरण मौर्य, जयपाल पुत्र श्यामलाल हरिजन और नन्हें पुत्र जगदीश हरिजन को दोषी करार दिया।
अदालत ने तीनों को धारा 302/34 आईपीसी के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इसके अलावा धारा 201 आईपीसी के तहत प्रत्येक को सात वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई।
अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। इस मामले में कुल 1.65 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
ऑटो चालक की पिटाई के बाद हुई थी मौत
दूसरा मामला बारादरी थाना क्षेत्र का वर्ष 2019 का है। अभियोजन के अनुसार, 26 अक्टूबर 2019 की शाम करीब चार बजे पप्पू पुत्र तोड़ीलाल ऑटो चलाकर अपने घर लौट रहे थे। वह संजयनगर स्थित अपने घर के पास पहुंचे तो वहां लखन पुत्र प्यारे लाल और नीरज गंगवार पुत्र सुखलाल गंगवार पहले से मौजूद थे।
आरोप के मुताबिक दोनों ने पप्पू से 150 रुपये की मांग की। रुपये देने से इनकार करने पर विवाद बढ़ गया और दोनों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों से पप्पू की पिटाई कर दी। मारपीट में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
परिजनों ने उन्हें उपचार के लिए राजेंद्र नगर स्थित सुशीला अस्पताल में भर्ती कराया। पेट में गंभीर चोट के कारण उनका ऑपरेशन किया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
मामले में थाना बारादरी में मुकदमा अपराध संख्या 1310/2019 के तहत धारा 304, 504 और 506 आईपीसी में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में भी अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने नौ गवाह पेश किए।
दो आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा
बुधवार को बरेली की एडीजे-05 अदालत ने लखन और नीरज गंगवार को दोषी करार दिया। अदालत ने धारा 304 आईपीसी के तहत दोनों को तीन-तीन वर्ष के कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
इसके साथ ही धारा 504 और 506 आईपीसी में दोनों को एक-एक वर्ष के कारावास तथा 4-4 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोनों को दो-दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इस मामले में अदालत ने कुल 18 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
पुलिस और अभियोजन की पैरवी रही अहम
बरेली पुलिस के मुताबिक, दोनों मामलों में दोषियों को सजा दिलाने में पुलिस और अभियोजन अधिकारियों की प्रभावी पैरवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पहले मामले में एसपी दक्षिणी एवं ऑपरेशन कन्विक्शन की नोडल अधिकारी अंशिका वर्मा, एडीजीसी स्वतंत्र पाठक, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बहेड़ी एवं विवेचक जीपी नैनवाल, एससी/एसटी कोर्ट की कोर्ट मोहर्रिर रश्मि और थाना बहेड़ी के कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल गौरव कुमार की भूमिका बताई गई है।
दूसरे मामले में एसपी दक्षिणी एवं नोडल अधिकारी अंशिका वर्मा, एडीजीसी दिगंबर सिंह, एडीजे-05 कोर्ट के कोर्ट मोहर्रिर हेड कांस्टेबल सरवीर सिंह और थाना बारादरी की कोर्ट पैरोकार महिला हेड कांस्टेबल मोनिका की प्रभावी पैरवी का उल्लेख किया गया है।
पुराने मामलों में भी सजा दिलाने पर जोर
बरेली पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिन्हित मुकदमों में पुलिस और अभियोजन की ओर से लगातार प्रभावी पैरवी की जा रही है। उद्देश्य यह है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले और पीड़ित परिवारों को न्याय का भरोसा मजबूत हो।
बुधवार को आए इन फैसलों को इसी अभियान के तहत पुलिस की पैरवी की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।