ऑपरेशन प्रहार: बरेली मंडल में अवैध प्राइवेट एसी बसों पर बड़ा शिकंजा, 59 बसें सीज, 81 के चालान
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ऑपरेशन प्रहार: बरेली मंडल में अवैध प्राइवेट एसी बसों पर बड़ा शिकंजा, 59 बसें सीज, 81 के चालान
रिपोर्ट/आसिफ अली
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बरेली। बरेली मंडल में बिना वैध परमिट और नियमों की अनदेखी कर लंबी दूरी तक यात्रियों को ढो रही प्राइवेट एसी बसों पर परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। तीन दिन तक चले ‘ऑपरेशन प्रहार’ के दौरान बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में संयुक्त प्रवर्तन टीमों ने सघन जांच अभियान चलाकर 59 बसों को सीज कर दिया, जबकि 81 बसों के चालान किए गए। इस कार्रवाई के बाद बस ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में हड़कंप मच गया।
परमिट की आड़ में चल रहा था लंबी दूरी का संचालन परिवहन आयुक्त के निर्देश पर 22 से 24 जुलाई तक चलाए गए इस विशेष अभियान की कमान अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) के.डी. सिंह गौर ने संभाली। अभियान में गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, मुरादाबाद समेत कई जिलों के प्रवर्तन अधिकारियों को लगाया गया। मंडल स्तर पर उप परिवहन आयुक्त कमल प्रसाद गुप्ता और आरटीओ (प्रवर्तन) प्रणव झा के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने देर रात तक जांच अभियान चलाया।
जांच के दौरान सामने आया कि कई बसें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट या ऑल यूपी कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट के आधार पर नियमित रूप से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए सवारी ढो रही थीं। विभाग ने इसे परमिट की शर्तों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए तत्काल कार्रवाई की।
दस्तावेजों की हुई सख्त जांच अभियान के दौरान बसों के परमिट, पंजीकरण, फिटनेस, टैक्स, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और राष्ट्रीय वाहन डेटाबेस से जुड़े सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। जिन वाहनों में नियमों का उल्लंघन मिला, उनके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
परिवहन विभाग के अनुसार, सीज की गई बसों की अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में तकनीकी जांच कराई जाएगी। यदि किसी बस में अनधिकृत स्लीपर, डबल डेकर बॉडी या अन्य अवैध मॉडिफिकेशन पाए गए तो उसका फिटनेस प्रमाणपत्र, पंजीकरण और परमिट तक रद्द किया जा सकता है।
यात्रियों की सुरक्षा का रखा गया पूरा ध्यान
कार्रवाई के दौरान विभाग ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को भी प्राथमिकता दी। जिन बसों को सीज किया गया, उनमें सफर कर रहे यात्रियों को पहले सुरक्षित रूप से नजदीकी रोडवेज बस अड्डे या डिपो तक पहुंचाया गया, उसके बाद ही बसों को कब्जे में लिया गया।
आरटीओ (प्रवर्तन) प्रणव झा ने बताया कि अधिकांश बसें सड़क सुरक्षा मानकों के अनुरूप मिलीं और यात्रियों की संख्या भी निर्धारित सीमा के भीतर थी। हालांकि कुछ बसों में ओवरलोडिंग और आवश्यक दस्तावेजों की कमी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की गई।
अभियान रहेगा जारी परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध परमिट या नियमों का उल्लंघन कर यात्रियों का परिवहन करने वाले वाहन किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। ऐसे अवैध संचालन के खिलाफ आगे भी लगातार विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।