बरेली स्मार्ट सिटी के कूड़ा कलेक्शन कर्मचारियों की हड़ताल से शहर में गंदगी का अंबार, सड़कों पर फेंका कूड़ा
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बरेली स्मार्ट सिटी के कूड़ा कलेक्शन कर्मचारियों की हड़ताल से शहर में गंदगी का अंबार, सड़कों पर फेंका कूड़ा
रिपोर्ट/आसिफ अली
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“13 हजार की जगह 7.5 हजार वेतन”: डोर-टू-डोर कूड़ा उठान बंद, कॉलोनियों में फैली दुर्गंध, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
बरेली:स्मार्ट सिटी मे डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन से जुड़े संविदा कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से बुधवार को बरेली की सफाई व्यवस्था चरमरा गई।
सामूहिक कार्य बहिष्कार के चलते शहर के कई मोहल्लों और बाजारों में कूड़ा उठान पूरी तरह बंद रहा। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर कूड़ा फेंककर अपना विरोध दर्ज कराया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
लगातार दूसरे दिन कूड़े के ढेर हड़ताल के कारण लगातार दूसरे दिन भी कॉलोनियों, गलियों और मुख्य बाजारों में कूड़े के ढेर लग गए। गर्मी और उमस के बीच फैल रही बदबू से स्थानीय निवासी परेशान हो उठे। लोगों का कहना है कि बीमारियों का खतरा बढ़ गया है और प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
वेतन और मुकदमे को लेकर नाराजगी कर्मचारियों की हड़ताल के पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहला, छह संविदा कर्मचारियों पर दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेना। दूसरा, वेतन में भारी विसंगति। कर्मचारियों का आरोप है कि अनुबंध के अनुसार उन्हें 13,000 रुपये महीना मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें सिर्फ 7,500 रुपये दिए जा रहे हैं। इसी विसंगति को दूर करने और साथियों पर लगे केस वापस लेने की मांग को लेकर कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया है।
बरेली स्मार्ट सिटी मे आंदोलन जारी रखने की चेतावनी आंदोलनकारी कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना है कि वे शहर की सफाई के लिए काम करने को तैयार हैं, लेकिन शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। कर्मचारियों के इस रुख से प्रशासन के सामने शहर की सफाई व्यवस्था बहाल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
प्रशासन पर दबाव इस पूरे मामले में अब प्रशासन को दो मोर्चों पर काम करना होगा एक तरफ शहर से कूड़ा उठाकर सफाई बहाल करनी होगी, दूसरी तरफ कर्मचारियों से बातचीत कर विवाद का हल निकालना होगा। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो गंदगी और बदबू से शहर के हालात और बिगड़ सकते हैं।