*“पेड़ छाप नवाब दूल्हा खां” ट्रेडमार्क केस में बड़ा फैसला, नकली कारोबार पर कोर्ट की सख्त रोक*

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*“पेड़ छाप नवाब दूल्हा खां” ट्रेडमार्क केस में बड़ा फैसला, नकली कारोबार पर कोर्ट की सख्त रोक*

रिपोर्ट/आसिफ अली

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*कोर्ट ने नकली बिक्री पर लगाई रोक*

*वाणिज्यिक न्यायालय बरेली का बड़ा फैसला, प्रतिवादियों को तंबाकू उत्पादों में समान पैकिंग और डिजाइन इस्तेमाल करने से किया प्रतिबंधित*

बरेली। लंबे समय से चल रहे चर्चित ट्रेडमार्क विवाद में वाणिज्यिक न्यायालय ने मैसर्स ताज मोहम्मद खान फर्म के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। वाणिज्यिक न्यायालय बरेली के पीठासीन अधिकारी श्री शाहिद रजा (एच.जे.एस.) ने अपने निर्णय में प्रतिवादियों को “पेड़ छाप नवाब दूल्हा खां” नाम, उसकी डिजाइन, रंग, पैकिंग और उससे मिलते-जुलते किसी भी चिन्ह का इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया है। यह मुकदमा मेसर्स ताज मोहम्मद खान, मलूकपुर बरेली की ओर से मोहम्मद इमरान खान और श्रीमती मुनीज फात्मा द्वारा दायर किया गया था। वादी पक्ष ने अदालत को बताया कि उनके प्रसिद्ध तंबाकू ब्रांड “पेड़ छाप नवाब दूल्हा खां” की बाजार में अच्छी पहचान और साख है, लेकिन कुछ लोग उनके ब्रांड की हूबहू नकल करके नकली तंबाकू बेच रहे थे। मुकदमे में इसरार मोहम्मद खां, अवैश खां, सुऐब खां, सुहैल खां और रियाज अहमद को प्रतिवादी बनाया गया था। वादी पक्ष का आरोप था कि प्रतिवादी न केवल उनके ब्रांड नाम का गलत इस्तेमाल कर रहे थे, बल्कि पैकिंग, रंग, डिजाइन और पाउच तक बिल्कुल उसी तरह तैयार कर बाजार में बेच रहे थे, जिससे ग्राहक असली और नकली उत्पाद में अंतर नहीं कर पा रहे थे। इससे फर्म की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा था और बिक्री भी प्रभावित हो रही थी। अदालत में वादी पक्ष ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए, जिनमें ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र, कॉपीराइट से जुड़े कागजात, असाइनमेंट डीड, लाइसेंस डीड, पुराने मुकदमों के आदेश और व्यापारिक अभिलेख शामिल थे। वादी ने बताया कि “पेड़ छाप नवाब दूल्हा खां” ट्रेडमार्क का उपयोग उनकी फर्म कई वर्षों से लगातार कर रही है और वर्ष 2019 में यह ट्रेडमार्क विधिवत पंजीकृत भी हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिवादी घटिया गुणवत्ता का तंबाकू तैयार कर उसी नाम और पैकिंग में बेच रहे थे, जिससे ग्राहकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी और उनके व्यापार की साख खराब हो रही थी। दूसरी ओर प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में दावा किया कि उनका परिवार वर्ष 1970 से “नवाब दूल्हा खां” नाम से तंबाकू का व्यापार करता आ रहा है और उनकी फर्म “नवाब दूल्हा खां टुबैको मर्चेन्ट” पहले से पंजीकृत है। प्रतिवादियों ने यह आरोप भी लगाया कि वादी पक्ष ने गलत तथ्यों और मिलीभगत के आधार पर ट्रेडमार्क अपने नाम पंजीकृत करा लिया। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रतिवादी अपने दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सके। अदालत ने यह भी माना कि वादी फर्म ही इस ट्रेडमार्क की वास्तविक और पूर्व उपयोगकर्ता (प्रायर यूजर) है, इसलिए कानूनन उसी का अधिकार अधिक मजबूत माना जाएगा। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि ट्रेडमार्क अधिनियम के अनुसार किसी पंजीकृत ट्रेडमार्क के स्वामी को उसके उपयोग का विशेष और कानूनी अधिकार प्राप्त होता है। अदालत ने यह भी माना कि प्रतिवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे पाउच, डिजाइन, रंग और पैकिंग इतने समान थे कि कोई भी सामान्य ग्राहक आसानी से भ्रमित हो सकता था और नकली उत्पाद को असली समझकर खरीद सकता था। इसी आधार पर अदालत ने वादी पक्ष के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा जारी करते हुए प्रतिवादियों, उनके एजेंटों, कर्मचारियों और सहयोगियों को “पेड़ छाप नवाब दूल्हा खां” नाम, डिजाइन, रंग और पैकिंग का उपयोग तंबाकू उत्पादों के निर्माण, बिक्री, वितरण, प्रचार और विज्ञापन में करने से पूरी तरह रोक दिया। अदालत ने साफ कहा कि भविष्य में यदि इस आदेश का उल्लंघन किया गया तो संबंधित पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला 26 मई 2026 को सुनाया गया, जिसे तंबाकू व्यापार और ट्रेडमार्क विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण और मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।