भाजपा क़े नए जिलाध्यक्षों की जारी हुई सूची विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा फेरबदल

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भाजपा क़े नए जिलाध्यक्षों की जारी हुई सूची विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा फेरबदल

रिपोर्ट/आसिफ अली

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लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए कई जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। प्रदेश नेतृत्व की ओर से जारी सूची को चुनावी तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नई टीम का ऐलान करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। यह फेरबदल आगामी चुनावी समर से पहले भाजपा के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

इन जिलों में बदले गए अध्यक्ष
जारी सूची के अनुसार बागपत से नीरज शर्मा को नया जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

पीलीभीत में गोकुल प्रसाद मौर्य को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

लखीमपुर खीरी से अरविंद गुप्ता को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

गोंडा में इकबाल बहादुर तिवारी को संगठन की कमान दी गई है।

अयोध्या जिले में राधेश्याम त्यागी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कमलेश श्रीवास्तव को अयोध्या महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
मीरजापुर से लाल बहादुर सरोज को जिला अध्यक्ष बनाया गया है।

सिद्धार्थनगर में दीपक मौर्य को नई जिम्मेदारी दी गई है।

शामली से रामजी लाल कश्यप को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

अमरोहा में उदय गिरि गोस्वामी को संगठन की कमान सौंपी गई है।

सहारनपुर से अजीत सिंह राणा को नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

चुनावी रणनीति का हिस्सा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है। भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों में पिछली जीत को दोहराने के लक्ष्य के साथ सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश कर रही है।

प्रदेश नेतृत्व ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं में नई नियुक्तियों को लेकर उत्साह का माहौल है, वहीं विपक्ष इस फेरबदल को चुनावी दबाव से जोड़कर देख रहा है।

संगठन को मिलेगा नया जोश नई टीम के गठन से पार्टी का फोकस बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क अभियान और क्षेत्रीय मुद्दों पर सक्रियता बढ़ाने पर रहेगा। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनावी जीत की कुंजी है।

आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नए जिलाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ को कितना मजबूत कर पाते हैं और चुनावी समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ता है।