वॉइस कॉल से चलेगा डिजिटल देश? सांसद नीरज मौर्य के सवाल ने सरकार की सोच पर उठाए सवाल
- Advertisement -
वॉइस कॉल से चलेगा डिजिटल देश? सांसद नीरज मौर्य के सवाल ने सरकार की सोच पर उठाए सवाल
रिपोर्ट/आसिफ अली
- Advertisement -
सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न से इंटरनेट बंदी को लेकर सरकार द्वारा दिये गये गोलमोल जवाब से सरकार की सोच और संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सांसद ने कानून-व्यवस्था के नाम पर समय-समय पर इंटरनेट सेवाएं निलंबित किए जाने से छात्रों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और ऑनलाइन काम करने वाले नागरिकों को होने वाले परेशानियों पर सरकार से जवाब मांगा था।
सरकार के उत्तर में कहा गया कि इंटरनेट निलंबन के दौरान वॉइस कॉल और एसएमएस जैसी सेवाएं चालू रहती हैं, ताकि लोग आपस में संपर्क कर सकें। सांसद के सवाल से यह बुनियादी सच्चाई सामने आई कि क्या वॉइस कॉल और एसएमएस इंटरनेट का विकल्प हो सकते हैं। आज इन्टरनेट रोजमर्रा की जिन्दगी की लाईफ लाइन है।
वॉयस कॉल या एसएमएस के जरिए न तो रेलवे या फ्लाइट टिकट बुक हो सकती है, न बैंकिंग या यूपीआई भुगतान संभव है, न ऑनलाइन पढ़ाई चल सकती है और न ही वेबसाइट सर्फिंग या डिजिटल ऑफिस वर्क किया जा सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र हों या मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी सभी का काम सीधे इंटरनेट पर निर्भर है।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि केंद्र सरकार के पास पिछले पांच वर्षों में इंटरनेट बंद होने से हुए आर्थिक नुकसान का कोई आंकड़ा ही उपलब्ध नहीं है। यानी करोड़ों लोगों की पढ़ाई, व्यापार और रोजगार प्रभावित होने के बावजूद सरकार ने इसका कोई ठोस आकलन नहीं किया।
सांसद नीरज मोर्य ने कहा कि सरकार नियमों का हवाला देकर जवाब दे रही है, लेकिन आम नागरिकों की वास्तविक परेशानियों पर कोई ठोस नीति या समाधान सामने नहीं आया। यह भी सवाल उठता है कि क्या दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों में कानून-व्यवस्था के नाम पर इस तरह बार-बार इंटरनेट रोका जाता है।
डिजिटल युग में इंटरनेट एक बुनियादी जरूरत हैं। सरकार के पास न तो नुकसान का लेखा-जोखा है और न ही इंटरनेट बंदी के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव की जवाबदेही तय करने की कोई व्यवस्था। अब जरूरत है कि सरकार इंटरनेट निलंबन को अंतिम विकल्प बनाए और हर फैसले से पहले जनता पर पड़ने वाले असर को भी गंभीरता से लिया जायें