भ्रष्टाचार और पेपर लीक की आग की लपटों में झुलसते छात्र अतुलमलिक राम

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इंदौर। भारत की शिक्षा प्रणाली एक भयानक तूफान के चपेट में आ बैठी है। एक ऐसा तूफान, जो धूल-मिट्टी के रूप में अपने साथ भ्रष्टाचार और पेपर लीक का बवंडर साथ लिए चल रहा है। एक ऐसा तूफान, जो अनगिनत छात्रों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को निगलता ही चला जा रहा है। इन तमाम सुर्खियों और जाँचों के पीछे एक गहरी पीड़ा और विश्वासघात की घिनौनी कहानी छिपी हुई है,

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जहाँ शैक्षिक ईमानदारी की नींव हिल रही है और छात्र अनिश्चितता और निराशा के दलदल में भीतर तक फँसते चले जा रहे हैं।

छात्रों के लिए, परीक्षाओं में शामिल होना और इसमें उत्तीर्ण होना शिक्षा में उपलब्धि हासिल करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सबसे महत्वपूर्ण क्षण है, जो उनके भविष्य को परिभाषित करता है

। नीट पेपर लीक और भ्रष्टाचार ने उनके सपनों को इस कदर चकनाचूर कर दिया है, जिसके बारे में जितनी बार बात की जाएगी, उतनी बार उन बेगुनाहों को इसके काँच चुभने के अलावा कोई और काम नहीं करेंगे। उनके कठिन परिश्रम और समर्पण का निष्पक्ष मूल्यांकन जो वास्तव में होना चाहिए था, वह अब दूषित हो चुका है। इसके प्रभाव गंभीर हैं, जो उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को ही नहीं, बल्कि उनके करियर की आकांक्षाओं को भी खतरे में डालते हैं।