धर्मेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव से मिलकर चली नई सियासी चाल, बरेली में बदल सकता है राजनीतिक खेल
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धर्मेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव से मिलकर चली नई सियासी चाल, बरेली में बदल सकता है राजनीतिक खेल
भाजपा से इस्तीफे के बाद सपा प्रमुख से मुलाकात, बेटी कीर्ति कश्यप समेत पहुंचे लखनऊ; शुभलेश यादव और वीरपाल सिंह यादव की मौजूदगी ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
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बरेली। भाजपा से दूरी बनाने के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ में हुई मुलाकात ने बरेली की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। धर्मेंद्र कश्यप अपनी बेटी कीर्ति कश्यप के साथ अखिलेश यादव से मिले। इस दौरान बरेली सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और वरिष्ठ सपा नेता वीरपाल सिंह यादव भी मौजूद रहे।
यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब धर्मेंद्र कश्यप भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में भाजपा से दूरी के तत्काल बाद सपा के शीर्ष नेतृत्व से उनकी मुलाकात को महज औपचारिक मुलाकात के बजाय बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा से दूरी, अब सपा के साथ राजनीतिक संवाद
धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा से इस्तीफा देते समय पार्टी के भीतर भीतरघात, राजनीतिक उपेक्षा और पिछड़े समाज के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे उठाए थे। इसके बाद अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात ने उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है।
हालांकि, अभी सपा में औपचारिक रूप से शामिल होने की कोई घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन भाजपा से अलग होने के बाद सीधे सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से संवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर माना जा रहा है।
बरेली में सपा के लिए भी बड़ा संदेश
धर्मेंद्र कश्यप का बरेली और आंवला क्षेत्र की राजनीति में लंबा प्रभाव रहा है। ऐसे में उनकी सपा नेतृत्व से नजदीकी बढ़ती है तो इसका असर सिर्फ एक नेता के दल बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
खास तौर पर पिछड़ा वर्ग और ग्रामीण राजनीतिक आधार को लेकर बरेली मंडल में पहले से चल रही राजनीतिक सक्रियता के बीच यह मुलाकात सपा के लिए संभावित राजनीतिक विस्तार के नजरिए से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शुभलेश और वीरपाल की मौजूदगी ने बढ़ाया सियासी वजन
अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान बरेली सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और वरिष्ठ नेता वीरपाल सिंह यादव की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय संगठन के प्रमुख नेताओं का साथ होना इस मुलाकात को बरेली के राजनीतिक संदर्भ से जोड़ता है।
यानी संदेश सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है—बरेली का सपा संगठन भी इस राजनीतिक संवाद में दिखाई दे रहा है।
चाणक्य नीति के नजरिए से क्या संकेत?
राजनीति में हर मुलाकात अपने आप में एक संदेश होती है। चाणक्य नीति के नजरिए से देखें तो समय, स्थान और साथ मौजूद चेहरे कई बार शब्दों से ज्यादा बड़ा राजनीतिक संदेश देते हैं।
भाजपा से अलग होने के बाद सपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात और उसमें बरेली के प्रमुख सपा नेताओं की मौजूदगी को इसी राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। अगर यह संवाद आगे राजनीतिक रिश्ते में बदलता है, तो भाजपा के लिए बरेली में एक नया राजनीतिक समीकरण चुनौती बन सकता है।
अब अगली चाल पर टिकी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि धर्मेंद्र कश्यप की अखिलेश यादव से यह मुलाकात सिर्फ राजनीतिक संवाद तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला सामने आता है।
एक तरफ भाजपा से उनका इस्तीफा और दूसरी तरफ सपा के शीर्ष नेतृत्व से सीधी मुलाकात—इन दोनों घटनाक्रमों ने बरेली की राजनीति में नई बिसात जरूर बिछा दी है। अब किस खेमे की चाल भारी पड़ती है, इसका जवाब आने वाले दिनों में धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम से मिलेगा।