साइबर अपराध पर थानेदारों की परीक्षा, किला बना नंबर-1 तो इज्जतनगर फिसड्डी
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साइबर अपराध पर थानेदारों की परीक्षा, किला बना नंबर-1 तो इज्जतनगर फिसड्डी
200 अंकों की साइबर रैंकिंग में किला थाना टॉप पर, हाफिजगंज दूसरे और साइबर थाना तीसरे नंबर पर; इज्जतनगर, बारादरी और कोतवाली सबसे निचले पायदान पर
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बरेली। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच बरेली पुलिस ने अब थानों के प्रदर्शन को सीधे रैंकिंग से जोड़ दिया है। मुकदमा दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि पीड़ित का पैसा कितनी जल्दी वापस कराया गया, संदिग्ध मोबाइल नंबर कितने ब्लॉक किए गए, शिकायतों का निस्तारण कितनी तेजी से हुआ और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस ने कितनी प्रभावी कार्रवाई की—इन सभी बिंदुओं पर थानों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है।
एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर जिले के 28 थानों और साइबर थाने के प्रदर्शन का 200 अंकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। जारी रैंकिंग में किला थाना 145.08 अंक हासिल कर जिले में नंबर-1 रहा। वहीं हाफिजगंज 143.43 अंक के साथ दूसरे और साइबर थाना 142.13 अंक लेकर तीसरे स्थान पर रहा। टॉप-3 के बीच मुकाबला इतना कड़ा रहा कि पहले और तीसरे स्थान के बीच महज 2.95 अंकों का अंतर रहा।
किला नंबर-1, टॉप-10 में इन थानों ने बनाई जगह
रैंकिंग में किला थाने ने 145.08 अंक के साथ पहला स्थान हासिल किया। हाफिजगंज को 143.43 अंक मिले, जबकि साइबर थाना 142.13 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर रहा।
फतेहगंज पूर्वी 139.72 अंक के साथ चौथे, आंवला 138.48 अंक लेकर पांचवें और अलीगंज 136.16 अंक के साथ छठे स्थान पर रहा। मीरगंज ने 132.37 अंक के साथ सातवीं रैंक हासिल की, जबकि प्रेमनगर 131.68 अंक लेकर आठवें नंबर पर रहा।
इसके बाद फतेहगंज पश्चिमी को 130.90 अंक के साथ नौवां स्थान मिला। शेरगढ़ 127.45 अंक हासिल कर टॉप-10 में दसवें स्थान पर रहा।
इज्जतनगर सबसे पीछे, बारादरी और कोतवाली की भी हालत खराब
रिपोर्ट कार्ड में शहर के कुछ प्रमुख थानों का प्रदर्शन बेहद कमजोर सामने आया। इज्जतनगर थाना महज 24.93 अंक हासिल कर 29वें और अंतिम स्थान पर रहा। वहीं बारादरी 58.84 अंक के साथ 28वें और कोतवाली 68.61 अंक लेकर 27वें स्थान पर रही।
बहेड़ी 72.56 अंक के साथ 26वें, जबकि भोजीपुरा 93.12 अंक लेकर 25वें स्थान पर रहा। शीशगढ़ को 95.12 अंक के साथ 24वीं रैंक मिली और देवरनियां 99.99 अंक के साथ 23वें स्थान पर रही।
इसके बाद भमौरा, कैंट और शाही क्रमश: निचली रैंकिंग में रहे। रैंकिंग ने साफ कर दिया कि साइबर अपराध से निपटने और शिकायतों के निस्तारण के मामले में अलग-अलग थानों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर है।
सिर्फ FIR नहीं, पैसा वापस कराया तो बढ़ेंगे नंबर
नई व्यवस्था में थानों का मूल्यांकन केवल मुकदमों की संख्या के आधार पर नहीं होगा। इसके लिए 14 अलग-अलग कसौटियां तय की गई हैं और कुल 200 अंक निर्धारित किए गए हैं।
इनमें NCRP शिकायतों का निस्तारण, FIR का पंजीकरण और उसका अपलोड, साइबर ठगी की रकम पर लियन, CEIR के जरिए मोबाइल की बरामदगी, संदिग्ध मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करना, Money Restoration Module (MRM), GRM और JIMS से जुड़े मामलों का निस्तारण प्रमुख रूप से शामिल हैं।
यानी पुलिस के लिए अब असली चुनौती सिर्फ FIR लिखना नहीं, बल्कि पीड़ित को राहत दिलाना होगी। साइबर ठगी में फंसी रकम को वापस कराने की कार्रवाई भी रैंकिंग में अहम भूमिका निभाएगी।
पेंडेंसी बढ़ी तो सीधे कटेंगे अंक
नई रैंकिंग व्यवस्था में लंबित मामलों को लेकर भी सख्ती दिखाई गई है। Money Restoration Module (MRM) और GRM का मामला लंबित रहने पर प्रति केस एक-एक अंक की कटौती होगी।
वहीं संदिग्ध मोबाइल नंबरों को ब्लॉक करने से संबंधित शिकायत लंबित रखने पर प्रति केस दो अंक काटे जाएंगे। इसका सीधा असर थाने की रैंकिंग पर पड़ेगा।
इस व्यवस्था के बाद थानों पर शिकायतों को लंबित रखने के बजाय समयबद्ध निस्तारण का दबाव बढ़ेगा। जितनी ज्यादा पेंडेंसी होगी, उतना ही रैंकिंग में नीचे जाने का खतरा रहेगा।
हर महीने बनेगा नया रिपोर्ट कार्ड
पुलिस की यह रैंकिंग एक बार की कवायद नहीं होगी। हर महीने जिले के सभी 28 थानों और साइबर थाने के प्रदर्शन का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। इन्हीं 14 मानकों के आधार पर नया रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा।
बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार की भी व्यवस्था की गई है। पहले स्थान पर आने वाली साइबर टीम को 10 हजार रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 7,500 रुपये और तीसरे स्थान वाली टीम को 5 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
आखिरी पायदान वालों पर कार्रवाई की चेतावनी
रैंकिंग में सबसे नीचे रहने वाली टीमों और थानों के लिए यह रिपोर्ट कार्ड चेतावनी भी है। फिलहाल अंतिम तीन टीमों को चेतावनी जारी की गई है। आगे भी तय मानकों पर प्रदर्शन कमजोर रहा तो संबंधित थाना प्रभारी और साइबर टीम के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस की नई व्यवस्था का संदेश साफ है—साइबर अपराध में अब सिर्फ मुकदमा दर्ज कर फाइल बंद करने से काम नहीं चलेगा। पीड़ित का पैसा वापस कराना, मोबाइल बरामद करना, संदिग्ध नंबर ब्लॉक करना और शिकायत का समय से निस्तारण करना ही थाने के प्रदर्शन की असली कसौटी बनेगा।