रक्षाबंधन कार्यक्रम की भगदड़ पर सियासत तेज: कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा, कहामामला बेहद संदिग्ध’, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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रक्षाबंधन कार्यक्रम की भगदड़ पर सियासत तेज: कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा, कहामामला बेहद संदिग्ध’, उच्चस्तरीय जांच की मांग

रिपोर्ट/आसिफ अली

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बरेली क्लब ग्राउंड में 27 अगस्त की घटना को लेकर कांग्रेस का 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा पीड़ित परिवार के घर, मृतका के परिजनों को हरसंभव मदद का भरोसा

बरेली। बरेली क्लब ग्राउंड में 27 अगस्त को आयोजित रक्षाबंधन एवं साड़ी वितरण कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ में 45 वर्षीय मधु की मौत के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। घटना को लेकर कांग्रेस ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
कांग्रेस का सवाल- आखिर घटना के बाद क्या-क्या हुआ?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय कपूर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना को लेकर प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस घटना में एक महिला की जान चली गई, उसके बाद भी मामले की कानूनी प्रक्रिया को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई।
संजय कपूर के अनुसार, मृतका के शव का पंचनामा नहीं कराया गया और पोस्टमॉर्टम भी नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि पीड़ित परिवार को अस्पताल से शव सौंप दिया गया और इसके बाद जल्द ही अंतिम संस्कार करा दिया गया। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि घटना सामान्य दुर्घटना थी तो उसकी कानूनी और चिकित्सकीय जांच की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए जरूरी था कि पूरे घटनाक्रम की विधिवत जांच होती और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के माध्यम से मौत के कारणों की पुष्टि की जाती।
20 हजार से अधिक महिलाओं की भीड़ पर उठाया सवाल
कांग्रेस ने कार्यक्रम में जुटी भीड़ को लेकर भी प्रशासन से जवाब मांगा है। संजय कपूर ने सवाल उठाया कि जब शहर में धारा 144 लागू थी, तब इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ किस अनुमति और किस व्यवस्था के तहत जुटी?
कांग्रेस का आरोप है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना के बावजूद भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकासी व्यवस्था तथा सुरक्षा इंतजामों को लेकर पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। ऐसे में सवाल यह है कि आयोजकों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने भीड़ की संभावित संख्या का आकलन क्यों नहीं किया।
सुरक्षा इंतजामों पर भी कांग्रेस ने घेरा
कांग्रेस नेताओं ने कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। पार्टी का कहना है कि हजारों लोगों की भीड़ वाले कार्यक्रम में पर्याप्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग, प्रवेश-निकास के अलग रास्ते, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और भीड़ को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम बेहद जरूरी थे।
भगदड़ के दौरान यदि भीड़ का दबाव बढ़ा तो उसे नियंत्रित करने के लिए मौके पर क्या व्यवस्था थी, इसको लेकर भी कांग्रेस ने जवाब मांगा है। पार्टी ने पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है।
‘मामला अत्यधिक संदिग्ध’, दबाव का लगाया आरोप
संजय कपूर ने घटना को “अत्यधिक संदिग्ध” बताते हुए आरोप लगाया कि किसी बड़े दबाव के कारण अब तक इस मामले में अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
कांग्रेस का कहना है कि एक महिला की मौत जैसे गंभीर मामले में सिर्फ बयानबाजी पर्याप्त नहीं है। घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, कार्यक्रम की अनुमति किस स्तर से मिली, भीड़ की संख्या कितनी थी, सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और भगदड़ के दौरान क्या हुआ—इन सभी सवालों का निष्पक्ष जांच के जरिए जवाब सामने आना चाहिए।
पीड़ित परिवार पर दबाव पड़ा तो आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पार्टी ने यह भी कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव नहीं होना चाहिए।
संजय कपूर ने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित परिवार पर किसी प्रकार का दबाव बनाकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पीड़ित परिवार के न्याय के लिए संघर्ष करेगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर आवाज उठाएगी।
घटना के बाद बढ़े कई सवाल
रक्षाबंधन एवं साड़ी वितरण कार्यक्रम में हुई महिला की मौत ने भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े आयोजन के लिए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की क्या योजना बनाई गई थी और उसका पालन किस स्तर तक हुआ।
इसके अलावा मौत के बाद की गई कानूनी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोप भी जांच का विषय बन गए हैं। यदि पंचनामा और पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया, तो इसके पीछे क्या परिस्थितियां थीं—यह भी जांच में स्पष्ट होना जरूरी है।
फिलहाल कांग्रेस ने इस पूरे मामले को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाने के संकेत दिए हैं। पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह मामले को शांत होने देने के बजाय जिम्मेदारी तय कराने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आगे भी आवाज उठाएगी।
अब निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। कांग्रेस के गंभीर आरोपों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और पुलिस इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं और घटना की जांच को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।