साढ़े चार लाख की ‘सेटिंग’, फिर भी पहुंचा जेल! वायरल ऑडियो के बाद आरक्षी मधुर निलंबित
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साढ़े चार लाख की ‘सेटिंग’, फिर भी पहुंचा जेल! वायरल ऑडियो के बाद आरक्षी मधुर निलंबित
रिपोर्ट/आसिफ अली
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पुलिस कार्रवाई से बचाने के नाम पर रकम तय होने का आरोप, कथित ऑडियो में तीन लाख रुपये का जिक्र; डेढ़ लाख रुपये को लेकर जहीर का नाम सामने आने का दावा, एसएसपी ने दिए जांच के आदेश
बरेली। पुलिस कार्रवाई से बचाने के नाम पर कथित तौर पर साढ़े चार लाख रुपये की ‘सेटिंग’ किए जाने और इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति के जेल पहुंचने का मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर रुपये के लेन-देन को लेकर बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी बरेली अनुराग आर्य ने थाना क्योलड़िया में नियुक्त आरक्षी मधुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच एएसपी/सीओ सिटी तृतीय बरेली को सौंपी गई है।
एसओजी के पकड़ने के बाद थाने में दाखिल करने का आरोप
शिकायतकर्ता राशिद की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, एक व्यक्ति को एसओजी ने पकड़ा था। इसके बाद उसे इज्जतनगर थाने में दाखिल किया गया। आरोप है कि पुलिस कार्रवाई से बचाने और उसे छुड़ाने के नाम पर कथित तौर पर साढ़े चार लाख रुपये की रकम तय की गई।
आरोपों के मुताबिक, रकम तय होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को पुलिस कार्रवाई से राहत नहीं मिली और बाद में उसके जेल जाने की बात सामने आई। इसी पूरे घटनाक्रम के बीच कथित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
कथित ऑडियो में तीन लाख रुपये का जिक्र
राशिद का दावा है कि वायरल कथित रिकॉर्डिंग में तत्कालीन एसओजी सिपाही मधुर कुमार तीन लाख रुपये मिलने की बात करता सुनाई देता है। कथित बातचीत को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि रकम किसके माध्यम से ली गई और उसका इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया।
हालांकि, वायरल ऑडियो की सत्यता और उसमें सुनाई दे रही आवाज किसकी है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन सभी बिंदुओं का खुलासा पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
डेढ़ लाख रुपये को लेकर जहीर का नाम
मामले में दावा किया जा रहा है कि कथित बातचीत के दौरान बाकी डेढ़ लाख रुपये जहीर के पास होने का भी जिक्र सामने आया है। इससे कथित लेन-देन में एक अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब जांच अधिकारियों के सामने यह पता लगाना अहम होगा कि कथित तौर पर साढ़े चार लाख रुपये की रकम तय होने की बात कितनी सच है और यदि रकम का लेन-देन हुआ तो वह किन लोगों के बीच और किस उद्देश्य से हुआ।
रकम वापस मांगने पर धमकी देने का आरोप
राशिद ने आरोप लगाया है कि कथित तौर पर दी गई रकम वापस मांगने पर उसे धमकाया गया। आरोप है कि उसे झूठे मुकदमे में फंसाने और जान से मारने की धमकी तक दी गई।
इन आरोपों की भी पुलिस जांच करेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में संबंधित अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
वायरल ऑडियो पर एसएसपी ने लिया संज्ञान
सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑडियो का एसएसपी बरेली अनुराग आर्य ने संज्ञान लिया। पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, वायरल ऑडियो में उत्कोच यानी रिश्वत के रूप में रुपये के लेन-देन संबंधी बातचीत होना प्रकाश में आया है।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने थाना क्योलड़िया में नियुक्त आरक्षी मधुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
इसके साथ ही पूरे मामले की जांच एएसपी/सीओ सिटी तृतीय बरेली को सौंप दी गई है।
जांच में खुलेगा साढ़े चार लाख की ‘सेटिंग’ का राज
अब जांच में कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। वायरल ऑडियो वास्तविक है या नहीं, उसमें आवाज किसकी है, कथित रकम का कोई वास्तविक लेन-देन हुआ या नहीं, रकम किसने ली और किसके कहने पर कथित ‘सेटिंग’ की बात हुई—इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी।
इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई किस आधार पर हुई और कथित तौर पर रकम तय होने के बावजूद वह जेल कैसे पहुंचा।
फिलहाल आरक्षी मधुर के निलंबन से पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लेने का संकेत दिया है। हालांकि, वायरल ऑडियो में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मानी जाएगी।
रकम से बड़ा सवाल खाकी की साख का
यह पूरा मामला सिर्फ कथित साढ़े चार लाख रुपये के लेन-देन तक सीमित नहीं है। वायरल ऑडियो ने पुलिस की कार्यशैली और खाकी की साख को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
यदि कथित आरोपों में सच्चाई सामने आती है तो यह तय करना भी जरूरी होगा कि इस पूरे प्रकरण में कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित रकम का वास्तविक हिसाब क्या था। वहीं, यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो जांच के जरिए स्थिति भी साफ होनी चाहिए।
फिलहाल आरक्षी मधुर निलंबित हैं और जांच एएसपी/सीओ सिटी तृतीय के हाथ में है। अब जांच ही तय करेगी कि साढ़े चार लाख की कथित ‘सेटिंग’ की कहानी कितनी सच है और इस पूरे मामले के पीछे असली खेल क्या था।