हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बेटे से नहीं मिलने दे रहे पिता और दादा? मां ने पुलिस से लगाई न्याय की गुहार, बरेली का मामला चर्चा में

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हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद बेटे से नहीं मिलने दे रहे पिता और दादा? मां ने पुलिस से लगाई न्याय की गुहार, बरेली का मामला चर्चा में

रिपोर्ट/आसिफ अली

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बरेली। बरेली में एक बार फिर आठ वर्षीय बच्चे युवराज सिंह की कस्टडी और विजिटेशन राइट का मामला सुर्खियों में आ गया है। इज्जतनगर निवासी सुमन सिंह ने आरोप लगाया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें अपने बेटे युवराज सिंह से स्वतंत्र रूप से मिलने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने पति, दादा और ससुराल पक्ष पर अदालत के आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए पुलिस से एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हाईकोर्ट ने हर रविवार मिलने का दिया था अधिकार सुमन सिंह के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 795/2026 में 3 जुलाई 2026 को पारित आदेश में बच्चे की अभिरक्षा उसके जैविक माता-पिता को सौंपते हुए उन्हें हर रविवार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक विजिटेशन राइट प्रदान किया था।

इसके बाद रिट-सी संख्या 22816/2026 में 6 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को निर्देश दिया था कि मुलाकात बिना किसी बाधा के कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाए।

‘कोर्ट का आदेश है, फिर भी बेटे से खुलकर नहीं मिलने दिया जा रहा’ सुमन सिंह का आरोप है कि पति हरवेन्द्र कुमार सिंह, दादा शीशपाल सिंह, नेहा सिंह, रोहित सिंह और अन्य परिजन लगातार मुलाकात में बाधा डाल रहे हैं।

उनका कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद उन्हें बेटे को गले लगाने, उससे सामान्य बातचीत करने या भावनात्मक रूप से मिलने तक नहीं दिया जाता। आरोप है कि मुलाकात के दौरान परिवार के सदस्य बच्चे को अपने बीच बैठाए रखते हैं, जिससे वह खुलकर अपनी बात नहीं कह पाता।

‘मेरा बेटा डरा-सहमा दिखा, मिलने के बाद रोता है’
सुमन सिंह ने दावा किया कि हाल की मुलाकात के दौरान उनका बेटा बेहद डरा हुआ दिखाई दिया। उनके अनुसार बच्चे ने सामान्य तरीके से बात नहीं की और उसके व्यवहार से लगा कि वह मानसिक दबाव में है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बच्चा इशारों में अपने साथ मारपीट होने की बात कह चुका है। सुमन सिंह का कहना है कि उनके पास इस संबंध में वीडियो रिकॉर्डिंग सहित कुछ साक्ष्य भी मौजूद हैं।

डीआईजी से लगाई कार्रवाई की गुहार
सुमन सिंह ने पूरे मामले की शिकायत डीआईजी अजय साहनी को सौंपते हुए हाईकोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन कराने, संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर गंभीर असर पड़ सकता है।

हाईकोर्ट ने भावनात्मक रिश्ते को भी माना था महत्वपूर्ण हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया था कि सुमन सिंह ने युवराज सिंह की परवरिश उसके महज 15 दिन की उम्र से आठ वर्ष से अधिक समय तक की है और दोनों के बीच गहरा भावनात्मक संबंध है।

अदालत ने यह भी दर्ज किया था कि बातचीत के दौरान बच्चे ने सुमन सिंह के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि, कानून के अनुसार जैविक माता-पिता को अभिरक्षा का अधिकार देते हुए कोर्ट ने सुमन सिंह को नियमित विजिटेशन राइट प्रदान किया था।

विपक्ष का पक्ष आना अभी बाकी
फिलहाल यह सभी आरोप सुमन सिंह की ओर से लगाए गए हैं। हरवेन्द्र कुमार सिंह, नेहा सिंह, शीशपाल सिंह या अन्य नामित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगी।