सरकार की चार बड़ी फार्मा कंपनियों में एक ही महिला का राज
- Advertisement -
भारत सरकार के मंत्रालयों में भ्रष्टाचार की खबरें कोई नयी बात नहीं हैं. पहले के समय में भ्रष्टाचार की चीजें थोड़ी जल्दी निकल कर सामने आती थी लेकिन अब समय के साथ-साथ भ्रष्टाचारियों ने भ्रष्टाचार करने के अपने तरीकों में भी बदलाव किया है, जिसका नतीजा यह हुआ है कि चीजें छन-छन कर सामने आती हैं. ऐसा ही एक मामला भारत सरकार के उर्वरक और रसायन मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल से निकल कर सामने आया है,
जिसके बारे में जानकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे. यह मामला कुछ ऐसा है, जिसे प्रथम दृष्टया देखने पर यही प्रतीत होता है कि इसमें ऊपर से लेकर नीचे तक सब के सब मिले हुए हैं. मंत्री संतरी से लेकर सरकारी कंपनियों के MD तक इस धांधली में शामिल प्रतीत होते हैं. समझिए क्या है पूरा मामला ?
- Advertisement -
दरअसल, उच्च क्षमता वाले फार्मास्यूटिकल्स उद्योग के विकास पर अधिक ध्यान दिया जा सके, इसके लिए साल 2008 में तत्कालीन सरकार द्वारा रसायन और उर्वरक मंत्रालय में एक अलग डिपार्टमेंट बनाया गया, जिसे डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल नाम दिया गया. इसी विभाग के अंतर्गत फार्मा की 5 सरकारी कंपनियों (CPSEs) को लाया गया, जिन्हें आम तौर पर CPSEs यानी सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज कहा जाता है.
डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल के अंतर्गत आने वाली कंपनियों में कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (KAPL), इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (IDPL), हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (HAL), बंगाल केमिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (BCPL) और राजस्थान ड्रग एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (RDPL) शामिल हैं. इन कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से ज्यादा है यानी सरकार इन कंपनियों को अपने हिसाब से मैनेज करती है.
लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन 5 में से 1 कंपनी तो पहले ही बंद हो गई. बाकी की 4 में से 3 कंपनियां भयंकर नुकसान में हैं और 1 कंपनी जो लगातार पिछले 13 सालों से लाभ कमा रही थी, अब सरकारी तंत्र उसका भी बेड़ा गर्क करने की तैयारी में है. जी हां, सरकारी तंत्र ही इन कंपनियों को डूबाने में जी-जान से जुटा हुआ है. वो कैसे, चलिए समझते हैं..