CMO कार्यालय में NHM संविदा कर्मियों का धरना, सरकार को खुली चेतावनी—मांगें नहीं मानीं तो 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल

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CMO कार्यालय में NHM संविदा कर्मियों का धरना, सरकार को खुली चेतावनी—मांगें नहीं मानीं तो 12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल

एक लाख से ज्यादा कर्मचारियों का फूटा आक्रोश, नियमितीकरण और समान काम-समान वेतन समेत 8 सूत्रीय मांगों पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान

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बरेली। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा कर्मचारियों का आक्रोश अब सड़क पर उतर आया है। अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर NHM संविदा कर्मचारियों ने CMO कार्यालय में धरना देकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा और 12 अक्टूबर 2026 से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 15 से 18 वर्षों से अधिक समय से स्वास्थ्य विभाग में पूरी जिम्मेदारी के साथ सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएं और सेवा सुरक्षा नहीं मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं को संचालित करने में बड़ी भूमिका निभाने वाले इन कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक काम लेने के बावजूद उनके भविष्य को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है।

CMO कार्यालय में धरना, सरकार के खिलाफ बढ़ा गुस्सा

गुरुवार को कर्मचारी CMO कार्यालय में धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा। वर्षों से लंबित मांगों पर ठोस फैसला चाहिए।

संगठन ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में दो प्रमुख मांगों को सबसे ऊपर रखा है। इनमें NHM संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण और समान काम के लिए समान वेतन प्रमुख हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि तत्काल नियमितीकरण संभव नहीं है तो कम से कम वर्तमान वेतन में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए और जिन पदों पर NHM कर्मचारी वर्षों से काम कर रहे हैं, उन पदों का स्वास्थ्य विभाग में सृजन किया जाए।

कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर की सेवा

संगठन ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भी NHM कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखा। टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी नियंत्रण, संचारी और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम सहित तमाम राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में संविदा कर्मचारी लगातार जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

इसके बावजूद वर्षों की सेवा के बाद भी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों जैसी सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलना उनके साथ अन्याय है।

10 लाख का कैशलेस बीमा और EPF की मांग

कर्मचारियों ने नियमितीकरण और समान वेतन के अलावा 8 सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इनमें कर्मचारी और उनके आश्रित परिवार के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का फैमिली फ्लोटर कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, महंगाई भत्ता (DA), प्रभावी EPF और नियोक्ता अंशदान, HRA अथवा सरकारी आवास और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

ट्रांसफर नीति और मृत्यु पर आश्रित को नौकरी की मांग

कर्मचारियों ने NHM में स्थानांतरण नीति बहाल करने की भी मांग की है। इसमें रिक्त पदों पर गैर-जनपद स्थानांतरण, म्यूचुअल ट्रांसफर और कर्मचारी के अनुरोध पर स्थानांतरण की सुविधा शामिल है।

इसके साथ ही सेवाकाल के दौरान किसी संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रित को योग्यता के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति देने की नीति बनाने की मांग भी की गई है।

सरकारी भर्तियों में 25 फीसदी कोटा

संगठन ने स्वास्थ्य विभाग की नियमित भर्तियों में NHM संविदा कर्मचारियों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मचारियों को भर्ती प्रक्रिया में उनकी सेवा अवधि और अनुभव का लाभ मिलना चाहिए।

5 से 7 अक्टूबर काला फीता, 8 से 10 अक्टूबर कार्य बहिष्कार

संगठन ने आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है। 5, 6 और 7 अक्टूबर को काला फीता बांधकर काम करते हुए विरोध किया जाएगा। इसके बाद 8, 9 और 10 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण कार्य बहिष्कार/कार्यविराम किया जाएगा।

यदि इस दौरान सरकार ने मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया और प्रतिनिधिमंडल से सार्थक वार्ता नहीं हुई तो 12 अक्टूबर से प्रदेशभर के NHM संविदा कर्मचारी लखनऊ पहुंचकर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।

कर्मचारियों ने दो टूक कहा है कि अब आंदोलन केवल ज्ञापन और आश्वासन तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले असर की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

CMO कार्यालय में शुरू हुआ यह धरना अब बड़े प्रदेशव्यापी आंदोलन की आहट दे रहा है। एक लाख से अधिक NHM संविदा कर्मियों की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।