राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने श्रुति गंगवार को बनाया प्रत्याशी, संतोष गंगवार की बेटी को मिला मौका

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राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने श्रुति गंगवार को बनाया प्रत्याशी, संतोष गंगवार की बेटी को मिला मौका

बरेली। राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से अपने आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। इनमें बरेली की श्रुति गंगवार का नाम शामिल है। श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल और बरेली के पूर्व सांसद संतोष गंगवार की बेटी हैं। भाजपा के इस फैसले के बाद बरेली और रुहेलखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

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श्रुति गंगवार लंबे समय से सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं। वह अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष भी हैं। आईआईटी पृष्ठभूमि की पेशेवर इंजीनियर श्रुति गंगवार का राज्यसभा के लिए चयन भाजपा की ओर से युवा और महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत को मिला नया चेहरा

बरेली की राजनीति में संतोष गंगवार का चार दशक से अधिक लंबा राजनीतिक सफर रहा है। वह आठ बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया।

अब उनकी बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से संतोष गंगवार के समर्थकों और बरेली भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

रुहेलखंड में सियासी संदेश

बरेली के साथ बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत रुहेलखंड के कई क्षेत्रों में कुर्मी समाज की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी है। ऐसे में श्रुति गंगवार को राज्यसभा का टिकट दिए जाने को भाजपा की सामाजिक और क्षेत्रीय रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, राज्यसभा का चुनाव विधानसभा या लोकसभा चुनाव की तरह सीधे जनता के वोट से नहीं होता। इसके बावजूद उम्मीदवारों के चयन का क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों पर राजनीतिक असर माना जाता है।

महिला और युवा चेहरे पर भाजपा का फोकस

भाजपा के इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू श्रुति गंगवार का महिला और अपेक्षाकृत युवा चेहरा होना भी है। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष के तौर पर उनकी भूमिका और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ाव के बाद अब उनका औपचारिक राजनीतिक सफर राज्यसभा के जरिए शुरू होने जा रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण के बीच भाजपा की ओर से अलग-अलग सामाजिक वर्गों और नए चेहरों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति लगातार चर्चा में रही है। ऐसे में श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी को भी इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

2027 से पहले बरेली की राजनीति में बढ़ी हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बरेली से श्रुति गंगवार का राज्यसभा उम्मीदवार बनना स्थानीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे संतोष गंगवार परिवार की राजनीतिक सक्रियता को नया विस्तार मिलने की संभावना है।

भाजपा के इस फैसले के बाद अब निगाहें राज्यसभा चुनाव की आगे की प्रक्रिया और मतदान पर रहेंगी। वहीं, श्रुति गंगवार के नाम की घोषणा ने बरेली की सियासत में एक बार फिर संतोष गंगवार परिवार को केंद्र में ला दिया है।