बरेली में बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर फेरा पानी, धान की फसल जलमग्न

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बरेली में बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर फेरा पानी, धान की फसल जलमग्न

24 घंटे में 127 मिमी बारिश से खेतों में भरा पानी, धान और गन्ने की फसल को नुकसान; किसानों ने सर्वे कराकर मुआवजे की मांग उठाई

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बरेली। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश अब किसानों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 127 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने से खेतों में पानी भर गया है। कई इलाकों में धान की तैयार होती फसल जलमग्न हो गई, जबकि गन्ने के खेतों में भी पानी भरने से फसल को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। अचानक बिगड़े मौसम ने किसानों की मेहनत और लागत पर संकट खड़ा कर दिया है।

बारिश का सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों और उन खेतों में दिखाई दे रहा है, जहां पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। धान के खेतों में कई जगह फसल पानी में डूबी नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि यदि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो धान की फसल में सड़न और अन्य रोग लग सकते हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होने के साथ किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

गन्ने के खेतों में भी भरा पानी

धान के साथ-साथ गन्ने की फसल भी लगातार बारिश की चपेट में है। कई खेतों में पानी जमा होने से गन्ने की फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों के मुताबिक इस समय फसलों में पहले ही काफी लागत लग चुकी है। ऐसे में बारिश से नुकसान होने पर उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।

किसानों ने मांगा फसल नुकसान का सर्वे

बारिश से प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल खेतों का सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव जाकर फसलों का वास्तविक नुकसान दर्ज करे, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा मिल सके।

किसानों ने यह भी मांग की है कि जलभराव वाले खेतों से पानी निकालने के लिए स्थानीय स्तर पर तत्काल इंतजाम किए जाएं। उनका कहना है कि लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।

127 मिमी बारिश ने बढ़ाई चिंता

जिले में 24 घंटे में हुई 127 मिमी बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि बारिश थमे और खेतों से पानी निकल सके। वहीं, प्रभावित किसानों की नजर प्रशासन की ओर है कि नुकसान का सर्वे कब शुरू होता है और उन्हें राहत कब तक मिलती है।

बारिश ने जहां शहरों में जलभराव की समस्या बढ़ाई है, वहीं गांवों में किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती खड़ी कर दी है। यदि आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहती है तो धान और गन्ने समेत अन्य फसलों पर नुकसान का दायरा और बढ़ने की आशंका है।