जॉइंट रिप्लेसमेंट के बाद कब पड़ती है दोबारा सर्जरी की जरूरत?

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जॉइंट रिप्लेसमेंट के बाद कब पड़ती है दोबारा सर्जरी की जरूरत?

बरेली – घुटने या कूल्हे का जॉइंट रिप्लेसमेंट उन लोगों के लिए राहत देने वाला इलाज है, जो लंबे समय से जोड़ों के दर्द या गठिया से परेशान रहते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में समय के साथ पहले लगाए गए कृत्रिम जोड़ में समस्या आ सकती है। ऐसी स्थिति में दोबारा सर्जरी करनी पड़ती है, जिसे रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट कहा जाता है।

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मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट्स एंड ऑर्थोपेडिक्स विभाग के वाइस चेयरमैन , डॉ. साइमन थॉमस बताते हैं, “रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट एक विशेष सर्जरी है, जिसमें पुराने या खराब हो चुके कृत्रिम जोड़ को बदलकर नया इम्प्लांट लगाया जाता है। यह सर्जरी सामान्य जॉइंट रिप्लेसमेंट से अधिक जटिल होती है और इसे अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन द्वारा किया जाना चाहिए।”

रिवीजन सर्जरी की जरूरत कई कारणों से पड़ सकती है। समय के साथ इम्प्लांट का घिस जाना या ढीला पड़ जाना, जोड़ के आसपास संक्रमण होना, बार-बार जोड़ का अपनी जगह से खिसकना, इम्प्लांट के आसपास हड्डी टूट जाना या लंबे समय तक दर्द और अकड़न बने रहना इसके प्रमुख कारण हैं।

डॉ. थॉमस कहते हैं, “अगर जॉइंट रिप्लेसमेंट के बाद दर्द बढ़ रहा हो, सूजन बनी रहे, चलने-फिरने में दिक्कत हो, जोड़ अस्थिर महसूस हो या बुखार और लालपन जैसे संक्रमण के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज से बेहतर परिणाम मिलते हैं।”

आज 3डी प्लानिंग, रोबोटिक तकनीक और आधुनिक इम्प्लांट की मदद से रिवीजन सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सटीक हो गई है। सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है। सही समय पर इलाज और अच्छी देखभाल से मरीज फिर से सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है।