बरेली में दुर्गा पूजा की धूम: संधि पूजा में धुनुची नृत्य कर बंगाली महिलाओं ने मां दुर्गा के चरणों में अर्पित की श्रद्धा
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बरेली में दुर्गा पूजा की धूम: संधि पूजा में धुनुची नृत्य कर बंगाली महिलाओं ने मां दुर्गा के चरणों में अर्पित की श्रद्धा
भक्ति, परंपरा और संस्कृति के रंग में रंगे दुर्गा पंडाल, धुनुची नृत्य ने बांधा समां; मां की आराधना में लीन नजर आईं महिलाएं
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बरेली। शहर में जगह-जगह स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में इन दिनों भक्ति, उल्लास और उत्साह का माहौल बना हुआ है। मां दुर्गा की आराधना के लिए पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से लेकर देर शाम तक पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आ रहा है। इसी क्रम में सोमवार को बंगाली समाज की महिलाओं ने विशेष संधि पूजा के अवसर पर पारंपरिक धुनुची नृत्य प्रस्तुत कर मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट की। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं के नृत्य ने पूजा पंडालों में अलग ही छटा बिखेर दी।
संधि पूजा के दौरान महिलाओं ने हाथों में धुनुची लेकर पारंपरिक अंदाज में नृत्य किया। धुनुची से उठता धुआं, धुन की लय और भक्ति में डूबी महिलाओं की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने धार्मिक माहौल को और अधिक आकर्षक बना दिया। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना में लीन दिखाई दिए। पंडालों में मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य आस्था, संस्कृति और परंपरा का सुंदर संगम रहा।
संधि पूजा का विशेष धार्मिक महत्व
बंगाली समाज में दुर्गा पूजा के दौरान संधि पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में यह पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस विशेष समय में मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु संधि पूजा में शामिल होकर मां के समक्ष अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
संधि पूजा के दौरान मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक विधियों का विशेष स्थान होता है। बंगाली समाज में इस अवसर को बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा में भाग लेती हैं और मां दुर्गा के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करती हैं।
धुनुची नृत्य ने बिखेरी परंपरा की खूबसूरती
धुनुची नृत्य बंगाली दुर्गा पूजा की प्रमुख सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। इसमें विशेष पात्र यानी धुनुची में धूप या धूना जलाकर मां दुर्गा के समक्ष लयबद्ध तरीके से नृत्य किया जाता है। यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि देवी के प्रति समर्पण और श्रद्धा व्यक्त करने का पारंपरिक माध्यम भी माना जाता है।
सोमवार को संधि पूजा के दौरान महिलाओं ने इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए धुनुची नृत्य किया। नृत्य की लय और पूजा के वातावरण ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। महिलाओं की प्रस्तुतियों में जहां बंगाली संस्कृति की झलक दिखाई दी, वहीं मां दुर्गा के प्रति उनकी अटूट आस्था भी नजर आई।
दुर्गा पंडालों में उत्सव जैसा माहौल
बरेली के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित दुर्गा पूजा पंडाल इन दिनों आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। धार्मिक आयोजन के साथ-साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बंगाली समाज अपनी समृद्ध परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है।
पूजा पंडालों में परिवारों के साथ पहुंच रहे श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में भी पर्व को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। संधि पूजा के अवसर पर आयोजित धार्मिक गतिविधियों ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया।
आस्था के साथ संस्कृति को सहेजने का संदेश
दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का भी अवसर है। धुनुची नृत्य जैसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज की पुरानी परंपराएं जीवंत रहती हैं और लोगों को अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने का अवसर मिलता है।
सोमवार को बरेली के दुर्गा पूजा पंडालों में संधि पूजा के दौरान देखने को मिला भक्तिभाव और उत्साह इसी सांस्कृतिक विरासत की झलक रहा। मां दुर्गा के चरणों में श्रद्धा अर्पित करती महिलाओं के धुनुची नृत्य ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। शहर में दुर्गा पूजा को लेकर बना उत्साह यह दर्शाता है कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं आज भी लोगों को एक सूत्र में बांधने का काम कर रही हैं।