शिक्षक एमएलसी चुनाव में बदला समीकरण, वित्तविहीन शिक्षकों ने 2014 में तोड़ा था शर्मा गुट का दबदबा
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शिक्षक एमएलसी चुनाव में बदला समीकरण, वित्तविहीन शिक्षकों ने 2014 में तोड़ा था शर्मा गुट का दबदबा
रिपोर्ट/आसिफ अली
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बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 23 अक्टूबर को मतदान, इस बार 46,573 शिक्षक करेंगे मताधिकार का इस्तेमाल; भाजपा ने हरि सिंह ढिल्लो पर फिर जताया भरोसा, संजय मिश्रा निर्दलीय मैदान में
बरेली। बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में इस बार मुकाबला दिलचस्प होने के साथ-साथ पिछले चुनावों की तुलना में बड़ा भी हो गया है। नौ जिलों में 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में कुल 46,573 शिक्षक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। वर्ष 2020 के चुनाव में मतदाताओं की संख्या 36,705 थी। इस लिहाज से इस बार 9,868 मतदाता बढ़ गए हैं।
इस चुनाव में भाजपा ने मौजूदा एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो को दोबारा प्रत्याशी बनाया है। वहीं 2014 में सपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल कर चुके संजय कुमार मिश्रा इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट ने मुरादाबाद के हिंदू कॉलेज के सुनीत को, जबकि चंदेल गुट ने विमलेंद्र शर्मा को प्रत्याशी बनाया है।
1972 से 2008 तक शर्मा गुट का रहा दबदबा
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट के चुनावी इतिहास में लंबे समय तक माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट का प्रभाव रहा। वर्ष 1972 से 2008 तक हुए चुनावों में इसी गुट के प्रत्याशी लगातार जीतते रहे। रमेश चंद्र शर्मा उर्फ विकट, केशव कुमार शर्मा, रामबाबू शास्त्री और सुभाष चंद्र शर्मा इस सीट से एमएलसी चुने गए।
वर्ष 1995 में उपचुनाव भी हुआ था। इसके बाद 1996 में रामबाबू शास्त्री और 2002 व 2008 में सुभाष चंद्र शर्मा निर्वाचित हुए।
2014 में बदला चुनावी इतिहास वर्ष 2014 का चुनाव इस सीट के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इससे पहले मुख्य रूप से वित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक ही मतदान करते थे, लेकिन वित्तविहीन शिक्षकों को भी मतदान का अधिकार मिलने के बाद मतदाता संख्या में बड़ा इजाफा हुआ और चुनावी समीकरण बदल गए।
शाहजहांपुर निवासी वित्तविहीन शिक्षक संजय कुमार मिश्रा ने वर्ष 2014 में सपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और शर्मा गुट के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव को खत्म करते हुए सीट पर जीत दर्ज की। इसके बाद इस सीट पर राजनीतिक दलों के समर्थन वाले प्रत्याशियों की भूमिका भी बढ़ी।
2020 में भाजपा समर्थित हरि सिंह ढिल्लो की जीत
वर्ष 2020 के चुनाव में अमरोहा निवासी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। भाजपा ने इस बार भी उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया है।
वहीं सपा ने संजय मिश्रा को इस बार प्रत्याशी नहीं बनाया। इसके बाद मिश्रा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। ऐसे में इस चुनाव में कई प्रमुख गुटों और राजनीतिक समर्थन वाले प्रत्याशियों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा।
नौ जिलों में बढ़े शिक्षक मतदाता इस बार बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सभी नौ जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। सबसे अधिक मतदाता बिजनौर में 8,077 हैं। इसके बाद मुरादाबाद में 7,504, बरेली में 6,772 और अमरोहा में 5,669 मतदाता हैं।
जिला
2020
2026
बरेली
6,230
6,772
बदायूं
3,275
3,893
पीलीभीत
1,967
3,500
शाहजहांपुर
3,846
4,607
रामपुर
2,742
3,093
मुरादाबाद
5,475
7,504
बिजनौर
6,354
8,077
अमरोहा
3,779
5,669
संभल
2,987
3,508
कुल
36,705
46,573
शर्मा गुट का दावा, संगठन अब भी मजबूत
माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के जिलाध्यक्ष नवनीत कुमार शर्मा का कहना है कि सभी नौ जिलों में संगठन का ढांचा आज भी मजबूत है। उनका कहना है कि वित्तविहीन शिक्षकों का झुकाव राजनीतिक दलों की ओर होने से संगठन को चुनाव में नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन संगठन की पकड़ कमजोर नहीं हुई है।
वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ चंदेल गुट के जिलाध्यक्ष श्याम नारायण शर्मा का कहना है कि वित्तविहीन शिक्षकों का झुकाव सत्ता पक्ष की ओर रहता है, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त काम नहीं होता। उन्होंने वित्तविहीन शिक्षकों से शिक्षक संघ के साथ आने की अपील करते हुए कहा कि संगठन के साथ जुड़ने पर उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है।
इस बार 9,868 नए मतदाता बदल सकते हैं. समीकरण बरेली-मुरादाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में इस बार मतदाता संख्या में करीब 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2020 में जहां 36,705 मतदाता थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 46,573 हो गई है। खास तौर पर पीलीभीत, मुरादाबाद, बिजनौर और अमरोहा में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वित्तविहीन शिक्षकों को मतदान का अधिकार मिलने के बाद जिस तरह 2014 में चुनावी समीकरण बदले थे, उसी तरह इस बार बढ़ी हुई मतदाता संख्या भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक होगी। हालांकि अंतिम तस्वीर 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।