बरेली में 30 सितंबर से गूंजेगा भक्ति का रंग, 9 दिन तक होगा भव्य रासलीला एवं भक्त लीला का मंचन
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बरेली में 30 सितंबर से गूंजेगा भक्ति का रंग, 9 दिन तक होगा भव्य रासलीला एवं भक्त लीला का मंचन
श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल का आयोजन, वृंदावन के स्वामी डॉ. देवकी नंदन महाराज की रास मंडली करेगी लीलाओं का मंचन; कृष्ण जन्मोत्सव से कंस वध और होली लीला तक होंगे धार्मिक कार्यक्रम
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बरेली। श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल (रजि.) बरेली की ओर से शहर में आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से 30 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक भव्य रासलीला एवं भक्त लीला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। आयोजन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रासलीला और रामलीला के मंचन के लिए पहचान रखने वाले वृंदावन निवासी स्वामी डॉ. देवकी नंदन जी महाराज एवं उनकी रास मंडली विभिन्न धार्मिक और भक्तिपरक लीलाओं का मंचन करेगी।
मंडल पदाधिकारियों के अनुसार भागवत टीकाकार श्रीधर स्वामी द्वारा भगवान के स्वरूप, भगवान की लीला, भगवान के धाम, भगवान के नाम और भगवान के परिकर को नित्य माना गया है। इसी आध्यात्मिक भाव को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से लीलाओं का आयोजन किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति, भक्ति परंपरा और धार्मिक कथाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कृष्ण जन्मोत्सव से होगी शुरुआत
आयोजन की शुरुआत 30 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं नंदोत्सव लीला से होगी। इसके बाद 1 अक्टूबर को भक्त शिरोमणि मीराबाई, 2 अक्टूबर को शिव-पार्वती विवाह और 3 अक्टूबर को श्री खाटू श्याम चरित्र का मंचन किया जाएगा।
4 अक्टूबर को गिरिराज पूजन और छप्पन भोग, 5 अक्टूबर को महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा चरित्र तथा 6 अक्टूबर को प्रभु जगन्नाथ महिमा की प्रस्तुति होगी। वहीं 7 अक्टूबर को भक्त नरसी मेहता चरित्र एवं नानीबाई का मायरा और 8 अक्टूबर को कंस वध, उग्रसेन राजतिलक एवं होली लीला का मंचन किया जाएगा।
सभी कार्यक्रम सायंकाल 6 बजे से रात 9:30 बजे तक आयोजित किए जाएंगे।
देश-विदेश में रासलीला का मंचन कर चुके हैं स्वामी देवकी नंदन
आयोजकों द्वारा जारी परिचय के अनुसार स्वामी डॉ. देवकी नंदन महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश-राजस्थान सीमा क्षेत्र के कामवन तहसील स्थित सहरा गांव में हुआ। उन्होंने वृंदावन पहुंचकर रासलीला के क्षेत्र में कार्य शुरू किया। हवेली संगीत, शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य और लोक संगीत के क्षेत्र में भी उन्होंने कार्य किया है।
परंपरागत रास और रासलीला के आचार्य के रूप में उनकी पहचान बताई गई है। श्रीकृष्ण रासलीला के क्षेत्र में उनके कार्य के लिए विक्रमशिला हिंदू विद्यापीठ विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें पीएचडी की डिग्री प्रदान किए जाने का भी उल्लेख प्रेस नोट में किया गया है।
आयोजकों के मुताबिक उनकी रासलीला और रामलीला का मंचन देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ इंग्लैंड, कनाडा, थाईलैंड और अमेरिका सहित विदेशों में भी हुआ है। इनके माध्यम से भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया जाता रहा है।
प्रेसवार्ता में आयोजन की जानकारी साझा
मंडल की प्रेसवार्ता में जुगल किशोर साबू, मोहन गुप्ता, कैलाश चंद्र शर्मा, विकास शर्मा, संजय झंवर, मुकेश अग्रवाल, नवीन गोयल, रामदयाल मोहता, पंकज अग्रवाल, प्रेम शंकर अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, आशीष मालू, संजय शर्मा, प्रकाश चंद्र शर्मा, हरिबाबू खंडेलवाल, रिंकू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मंडल के मीडिया प्रभारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य धार्मिक लीलाओं के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव को बढ़ाना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रमों में पहुंचने की अपील की।