कुक्कुट पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

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कुक्कुट पालन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

सीएआरआई में 2 नवंबर को 48वां स्थापना दिवस और विराट कुक्कुट मेला, 50 से अधिक स्टालों पर प्रदर्शित होंगी आधुनिक तकनीकें और उन्नत नस्लें

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बरेली। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है। कम जमीन, कम लागत और कम समय में बेहतर आमदनी देने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खोल सकता है। आधुनिक तकनीकों, उन्नत नस्लों और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए कुक्कुट पालन को अधिक लाभकारी बनाकर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती दी जा सकती है। यह बात केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई), इज्जतनगर के निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने कही।

संस्थान के 48वें स्थापना दिवस के अवसर पर आगामी 2 नवंबर को विराट कुक्कुट मेला एवं कुक्कुट कृषक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम की थीम ‘कुक्कुट नवाचार प्रौद्योगिकियां : आत्मनिर्भर भारत’ रखी गई है। इस आयोजन में देशभर से कुक्कुट पालकों, किसानों, उद्यमियों, कंपनियों के प्रतिनिधियों और पशुपालन क्षेत्र से जुड़े लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। मेले में 50 से अधिक स्टाल लगाए जाएंगे, जहां कुक्कुट पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, उपकरणों, उत्पादों और नवीन अनुसंधानों की जानकारी दी जाएगी।

उन्नत नस्लों और वैज्ञानिक तकनीकों पर रहेगा जोर

प्रेसवार्ता में निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने बताया कि परंपरागत तरीके से कुक्कुट पालन करने के बजाय वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसके लिए बेहतर नस्लों का चयन, संतुलित आहार, उचित आवास व्यवस्था, स्वच्छता, वैज्ञानिक प्रबंधन और समय पर रोग नियंत्रण बेहद जरूरी है। संस्थान की ओर से विकसित उन्नत पक्षी किस्मों और तकनीकों के माध्यम से किसानों को व्यवसाय की नई संभावनाओं से परिचित कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कुक्कुट पालन ऐसा क्षेत्र है, जिसे छोटे और सीमांत किसान भी अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार शुरू कर सकते हैं। इससे न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी, बल्कि गांवों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को इस क्षेत्र में उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

40 के करीब उन्नत जर्मप्लाज्म लाइनें विकसित करने में योगदान

डॉ. त्यागी ने बताया कि वर्ष 1979 में स्थापित केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान ने कुक्कुट अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। संस्थान अब तक करीब 40 उन्नत जर्मप्लाज्म लाइनों, किस्मों और क्रॉस के विकास में योगदान दे चुका है। इनमें कैरी देवेंद्र, कैरी निर्भीक, हितकारी, उपकारी और कैरी गोल्डन जैसी विकसित किस्में शामिल हैं। इनका उद्देश्य किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल बेहतर उत्पादन देने वाली पक्षी किस्मों की उपलब्धता कराना है।

25 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधि करेंगे संवाद

कुक्कुट मेले में 25 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। वे किसानों और वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर अपने उत्पादों, तकनीकों और सेवाओं की जानकारी साझा करेंगे। मेले में विभिन्न प्रजातियों के जीवित पक्षियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जो आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगी। इसके साथ ही कुक्कुट पालन से संबंधित प्रशिक्षण, नवीन अनुसंधान, तकनीकी जानकारी और उद्यमिता विकास पर चर्चा की जाएगी।

कुलपति डॉ. सुमंत व्यास होंगे मुख्य अतिथि

स्थापना दिवस समारोह में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति डॉ. सुमंत व्यास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहायक महानिदेशक डॉ. एचके नरूला विशिष्ट अतिथि रहेंगे।

संस्थान का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से किसानों तक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों का लाभ पहुंचाना है, ताकि कुक्कुट पालन को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखकर एक व्यवस्थित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सके। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर नई तकनीकों को खेत और गांवों तक पहुंचाने की दिशा में भी यह मेला महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।